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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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7 अगस्त 2016

सूर्य वंदना -07-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

दिनकर तुं दिनता हरण, वरण सुवरणो व्योम
जगत जगत हे जोगडा, भगत रटत सूर भोम

हे भगवान सुर्य नारायण तमे दिनकर (दिवस करनार) छो पण दिनता(दारीद्र) हरनार छो तथा सुवर्ण (सोनाजेवा)वरण (रंग) थी आभ मां सोभो छे, आ जगत(दुनीया) जगत (जागता नी साथे) भगतो जे छे ते भोम पर तमारुं रटण करे छे, आपने मारा नित्य वंदन छे,
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