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28 सितंबर 2016

चाहे तो अमीर रहे चाहे तो फकीर रहे :- रचयिता : राजकवि  पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला. भावनगर

चाहे तो अमीर रहे चाहे तो फकीर रहे

रचयिता : राजकवि  पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला. भावनगर

                         कवित

चाहे तो  अमीर  रहे  चाहे तो  फकीर  रहे ,

चाहे तो वजीर  रहे  राज  सनमान में ,

चाहे  निज  देश  रहे  चाहे  परदेश  रहे

चाहे तो मलिन  रहे  चाहे  खानपान में,

चाहे  मलहीन  रहे  चाहे  जनदीन  रहे ,

तेसे  परबीन  रहे  लीन  गानतान  में ,

पिंगल  भनंत  परवाना  जब  आवेपास,

सिंहाना  दिवाना  तऊ  डेरा  समसानमें.

संकलन : अनिरुद्ध  जे.  नरेला

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