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22 सितंबर 2016

आई श्री पीठड मां नी चरज : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई  श्री  पीठड  मां*
            *चरज*
राग..हालीरै ऐ हालीने मारा....

भेलडिये ऐ भूजाळी बेठी बाटी कूळ बीरदाळी जो विघन ऐ हरोने वडहथ वाळीरे
ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...टेक..

अरणा ऐ अहवारी हाथे हेमनी लाकडी वाळीजो,
मां खाडूं रे लावनारी तूं खमकारी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो....1

जाहलनी ऐ वारे हाल्यो जूनाणानो राजा जो,
तेदी' दरियाने ऐ पीधो तेंतो दयाळी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो....2

नावलडी ऐ नोधारी वावडो वेरी लाग्यो वा'वा जो,
मने वमळेथी ऐ बचावो वालप वाळी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...3

*दिलजीत* ने ऐ भरोंसो तारो भारी लेळिया वाळी जो,
मां छोरुनी ऐ राखो नित रखवाळी ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...4

            *दूहो*
तूं विना त्री लोकमां ऐके नही आधार,
हवे' वेली करजे वार पोताना जाणीन पीठबाई,

    आ चरज अमारा कूळदेवी
*आई  श्री  पीठड  मां*
नो मढ भेला' भेलडी' अने बाबरियात आ त्रणे गाम ऐकज बापूना वंश वारसदार ना छे *मूळ गाम भेला* उपरथी  *भेवलिया-बाटी*अमारी शाखा छे आ त्रणे गामनो मढ ऐकज गाम भेलडी मा छे जे आ चरज भेलडिये भूजाळी एवू लख्यू छे आपनी जाण माटे
*दिलजीत बाटी ढसा जं.*
ना जै माताजी मो 9925263039

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