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1 अक्तूबर 2016

आई श्री सोनलमां भाव : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री सोनल मां*
          *भाव*
राग..माताजी हूं आटलू मागू..

सोनल आई शरणू तारु, माडी जालो बावडू मारु,...टेक

साद सूणी आवी चारणोना तूं मढडे सोनलमात,
कफरा आ कळीकाळमां तारी
सघळी चारण नात सोनल आई .....1

मती फरीने मोणीये आव्यो बव समजाव्यो बाई,
मान्यो नही मां मांडळीक ऐनू
राज उथाप्यू आई, सोनल आई.....2

सावज जोड्यो रथडे तेदी करणी झालीन कान,
कूळ चोराडा जन्मी मां तूं
परा शकित परमाण,सोनल आई......3

फरतो तो बव फाटमा सूबो
बेंकीयो बाकरखान,
सिंहणी थईने जीवणी ऐना पलमा लीधा प्राण, सोनल आई.......4

राणल गंगा आई राजल के समरथ चारणबाई,
गात्राड गेली आई गढेशी के तूं रववाळी रवराई, सोनल आई..5

मोगल चामूंड मावडी के तूं जबरी जानलआई,
अनेक रुपो आई तमारा कृपाळू कागबाई,सोनल आई .6

मढडा भाळी मूरती मानी ऐज अवतारी आई,
दिलजीत बाटी नी चरजू सूणी बेलपे रेजो बाई,सोनल आई..7

मढडा वाळी मां सोनल आई
ने स्नेह वंदना
दिलजीतबाटी ना जै सोनलमा मो..9925263039

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