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4 अक्तूबर 2016

रचयिता:राजकवि पिंगलशीभाई पाताभाई नरेला. भावनगर

रचयिता:राजकवि  पिंगलशीभाई  पाताभाई  नरेला. भावनगर

                दूहो

अमृत  जरनी  नैनमें ,  करनी  जे  जे   कार ,

दुःख हरनी नीज भक्तको, सुख करनी संसार.

             सवैया : सिंहावलोकन

करनी  मुख  कोटी  दनं  करनी , पुनी  कोटी  मयंकरनी  करनी ,

करनी   मुख  भक्त   दया  करनी,    वरनी   करदत्त   शंभुवरनी ,

वरनी  जननी  कवि  योगयथा , धन  आप  पवित्र  सदा धरनी ,

धरनी  रसना  शिव  धयान सदा ,भव  पार  मंदाकिनी ते केरनी.

संकलन:  अनिरुद्ध जे. नरेला.

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