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30 जनवरी 2017

|| बाप || रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

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.    रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)
.      ढाळ: पाये तने विपळी लागु

काळजडां ई बाप ना केवा, जुगो जुग वंदवा जेवा.
राखे हेत संग मां रेवा, लाडकडा ना वारणा लेवा...टेक
वाळ वांको एना व्हाल सोया नो, करवा आवे कोय
जीव सटो सट बंकडो जीके , हिमत भले ने ना होय.
छोरु नी न चाहतो सेवा, काळजडां ई बाप ना केवा..01
धोध वरखायुं धिकती हो के, ताळवां तोडेय ताप
जणियां काजे जगमां जुजे, बेही रीये नई बाप
मागे नई केय दी मेवा, काळजडां ई बाप ना केवा..02
मलक आखु गण मात ना गावे, सोरुडां पाडेय साद
पुत्र काजे जेणे प्रांण ने त्याग्या, ई, अवधपिता नई याद
जांणे दसरथ ना जेवा,काळजडां ई बाप ना केवा..03
परख पिता नी पुत्रने थाती, होयना ज्यारे हयात
आंखडी थी एने यादीयुं रेले, ने, वहमी लागे वात
अंतर थी बोल दे एवा, काळजडां ई बाप ना केवा..04
जीव जेवो जोगीदानजी जेने,  पुत्र माथे हद प्रेम
दख वेठे पण दाखवे नई ई, कहो भुलाये केम.
दिकरा कज करतो देवा, काळजडां ई बाप ना केवा..05
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