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21 जनवरी 2017

|| शारदा अष्टक || रचना : जोगीदान गढवी(चडीया)

.          *|| शारदा अष्टक ||*
.          *छंद:  भुजंग प्रयात*
. *रचना : जोगीदान गढवी(चडीया)*

सुंणो आरदा सारदा मा सगत्ती
विंणा वाम हाथे सुगाथे वगत्ती
जणीं जोगडा ज्योत मातुं जगत्ती
भणुं आसनी पद्म भावे भगत्ती.||01||

सुरो सात नी मात तुं वेद वांणी
नमुं पाय तोळे प्रसो शिस पांणी
जपी जोगडो गावतो हेत गांणी
असां उरमे मां उजांणी उजांणी.||02||

तुंही वेद वाता दीपो सुर दाता
गुणीं काल ग्याता सुक्राता सुहाता
भणें जोगडो भाग्य वारी विधाता
असुरा सुरा साज मे सुर साता.||03||

तुंही स्वेत पद्मे की हंसे  बीराजे
मया जोगडा चारणा रस्ण राजे
बणें छंद गीता गीरा गोम गाजे
अनेकाय नेकाय सुं काज साजे.||04||

तुंही मात योगा न जोगा जणेत
तुंही सुर शब्दा परब्धा प्रणेता
तुंह मन्न वांणीय जांणी जनेता
तुंहीं प्रांण पांणी विनांणी वनेता.||05||

तुंही ब्रह्म चारी सदा स्वेत सारी
जपुं नाम जारी उचारी उचारी 
असां घट्ट मे मां रहो ऐक धारी
पडुं पाय तोरे  पुकारी पुकारि. ||06||

बिधु शब्द बंबा गिरंबा गजानी
अचंबा भया मां प्रलंबा पखानी
जपां जोगडा जुग दंबा जुबानी
अळां आदी अंबा बसो नित्य बानी.||07||

सदा स्वेत धाता लळी पाय लागुं
जगावो जीवे ज्योत जे तेज जागु
जगे जोगीदानम् तमो गुंण त्यागुं
महा सुर मां सुरता मात मागुं.||08||

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