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23 फ़रवरी 2017

|| श्री कष्ण अर्जुन || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                 || श्री कष्ण अर्जुन ||
.         रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
.                छंद : पद्धरी नी चाल
कटी बंध खेत्र कुरु क्रिष्ण चंद. वसू देव पुत्र धट रटत नंद.
नटखट नटवर कीन संख नाद ड़ंणकंत डणणण दीय सिंघ साद.01

अरजण रण दरसण करत काल.करसण धर धणणण धरत ढाल.
बणणण बरसत गांडीव बांण. तणणण अरजण दीय पणछ तांण.02
सणणण रत सौंणीत उडत सोळ. गणणण नभ ग्रिध्धण घुमत गोळ.
रणणण बज रथ चक रमत रंग. ठणणण कुद ठैकत कटत अंग.03
तांडव न्रत सम तीर कसां तौल, गांडव घर घर पर बकत बौल.
वरणन अरजण कन विद्व वान, गरज्यो करसण रण सिंघ गान.04
विट्ठल धरियत वैराट रूप्प, चख चकित दैख सब भयैं चूप्प.
लह लहत जीभ डणक्यों डढाळ, कर रुप धर्यो विकराळ काळ.05
दरसण करसण बण दसौं दीश, विफर्यो विशवेस्वर भूजा वीश.
नभ फाड़ कीयो नरसिंघ नाद, पणस्यां तज अरजण पड्यो पाद.06
जणणण कर झुल्लत खलक खाट. सणणण हथ चक्कर सणसणाट.
दरसत रण वाळत दैत दाट. नभ धर नटराजन करत नाट.07
चारण गण चडीया ग्रहत चाळ. मधु कैटभ भरखण मूंड माळ
जळळळ उतरत घर जोगीदान. गणणण कर जगपर क्रिष्ण गान.08
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