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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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14 फ़रवरी 2017

आयल उग्यां रे आकाश रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.          *आयल उग्यां रे आकाश*
.    *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
.        *ढाळ: चारणी लग्न गीत*

आयल उग्यां रे आकाश...हो जीरे मोगल उग्यां रे आकाश...
उगतां रे आखी नात्य ने अंजवाळीयुं हो मात...टेक

ओखा धर अखीयात...हो जीरे ओखा धर अखीयात...
जनमीरे  चारण  जोग  माया  जागती हो मात..01

समरी छोरुं पाडे साद...हो जी रे समरीन छोरु पाडे साद..
हे उदो रे करती एक  स्वासे आवती हो मात..03

डंणकी डुंगरडे डाढाळ..हो जी रे डंणकी डुंगरडे डाढाळ...
होकारा करती हाक दई ने हूकळी हो मात..03

जोयां जोयां जोगी दान..हो जीरे जोयां जोयां जोगी दान...
नोरते रे रमवा नवे लाखुं निकळी हो मात...04

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