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24 मार्च 2017

मोगल शासन समये गौहत्या निवारनार 'अवतार चरित्र ' ग्रंथना रचियता चारण कविराज नरहरिदानजी...!

मोगल शासन समये गौहत्या निवारनार  'अवतार चरित्र ' ग्रंथना रचियता चारण कविराज नरहरिदानजी...!

न्यायनो धंट गाये वगाडयो. बादशाह कहे गायनी शुं फरियाद होई शके ? त्यारे नरहरिदानजीऐ ऐक कवित सभामां वहेतुं कयुॅ के गायनी पण आ फरियाद छे.

अरही दंत तृण घरही, तो ही मारत न सबल कोही.
में अहॅनिश तृणचरती, बचन उचारती दीन होही.

अथाॅत : गमे तेवो बळवान माणस होय पण तेनो शत्रु ऐकवार मोंढामां धासनुं तरणुं लईने कहे छे के बस मने मारशो नहि तमारी गाय छुं. तो पेलो बळवान तेने मारतो नथी. ज्यारे हुं पोते ऐक गाय रोज खडना तरणां मोंमा लई भांभरडा नाखुं छुं. तोय मारो वघ केम ?

अमृत सम पैही श्वरी, बच्छ मोही थंभ कहावे.
हिन्दु ही अमृत देत, कटु तुरकेन नही आवे.

अथाॅत : मारा आंचळमां अमृत समान दूघ सदैव झरे, मारा बचडा बळद खेतीना थंभ गणाय. वळी मारुं दूघ हुं हिन्दुओने मीठुं अमृत जेवुं अने मुसलमानने कडवुं आपुं ऐवो भेद अमारे अबोल जानवरोने पण नथी. त्यारे तम मानवीओने आवो भेदभाव शामाटे ?

नरहरि कहंत अकबर सुनो, विनवे गौव जोरे करन,
अपराघ कौन मोरा मारीयात, चाम मोरी सेवत चरन.

कविराज नरहरिदान कहे छे के अकबर गाय तने विनवे छे के मारा मृत्यु बाद मारां चामडाना जोडा लोकोना पगनी रखवाळी करे छे. तोय मारो शुं अपराघ छे. के मारो वघ करवामां आवे छे.

अाटलुं सांभळता ज नरहरिदानना शब्दो अकबरना हैये कोतराई गया, अकबरना मनमां गायो पर करुणा भराई आवी अने कहेवाय छे के बादशाह अकबरे ऐ ज समये ऐना राजमां गौहत्या पर प्रतिबंघ जाहेर कयोॅ हतो.

नोघ : चारण अस्मितामां जांहगीरनुं नाम आवे छे. मने ऐक लेख मळ्यो ऐमां अकबर नाम आवे छे.

कवि चकमक पण सौने अरज करे छे कारण हुं पण ऐक चारण छुं. कोई पण जीवनी हत्या करवानो आपणो अघिकार नथी. कोईनुं जीवन आपी नथी शकता तो अबोल पशुनुं जीवन निदॅयताथी लेवानो तमने शुं अघिकार छे ?

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

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