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20 मई 2017

आईश्री सोनल शकित चालीसा

आईश्री सोनल शकित चालीसा
           दोहो
सोनल गुन सागर सम,
विशाल व्योम समान
बरनहुं चारन बिमलयश,
शकित दे कृपा निधान
             चोपाई
जय सोनल शकित सुख करनी| जय हमीर सुता दू:ख हरनी ||
राणल पुत्री जननी भवानी |
असुर मर्दिनी चंडी समानी ||
श्याम लोंबडी नयन विशाला |
शकित स्वरूपे चारन बाला ||
सोनल रूपे तुं हीं सुहावे |
बालक दरशन कर सुख पावे ||
भारत भूमि गुर्जर देशा |
जहां जन्मे सब संत विशेषा ||
सोरठ धरा मढ़डा ग्रामा |
प्रगटी सोनल शकित श्यामा ||
पोष शुकल बीज सुखदाई |
चारन गृहे अंबा आई ||
प्रगट भई सोनल पुनिता |
शिखावन आई अंबा सुनीता ||
चारन कुलमें हुई काल रात्री |
सोनल सुविता भै सुखदात्री ||
तुं हीं,भारती आवड आई |
खोडल,मोगल,हिंगला माई ||
देवल, राजल मा सोनबाई |
रवेची, बौचर अरू नागबाई ||
कागल, पीठळ मा तुं करनी |
अशरन शरन तारन तरनी ||
तुं हीं सर्व शकित स्वयं जग मांहीं |
सचराचरमां तुं हीं समाहीं ||
सांया ईसर दास तुमारा |
पुत्र भक्तमां प्राण ते प्यारा ||
काग, पिंगल, शंकर समाना |
शकित तुम्हारी से बलवाना ||
समाजमां निज गेह बुलाये |
चारन वंदन करी हरषाये ||
ग्राम ग्राम में सोनल आई |
धर्म काज धुमी सब माई ||
धरम स्थापन अंबा आई |
सत्य सनातन रक्षक कहाई ||
ऐकहीं माला मोती अनेका |
बिखर गये थे चारन लोका ||
पुन: सुगंठीत मा सब किन्हा |
द्रेष कलेष बिदाय लीन्हा ||
नमो नमो मा मढडा वासी |
नमो नम: सोनल सुखरासी ||
बल बुद्धि विधा गुन शील खानी |
दे सुख शांति कृपालु दानी ||
ज्ञान विज्ञान संपत्ति दाता |
सद् गुन दे आई सोनल माता ||
चारन समाज है बड भागी |
जिन पर आई अंबा अनुरागी ||
जयति जयति सोनल जगमाता |
आदि शकित त्रिभुवन दाता ||
यश तुमारो जन जन गावे |
सुमीरी नाम सब फल पावे ||
आई अन्नपूर्णा सब जगपाला |
सर्जक संहकार माहीं दयाला ||
तुं हरता करता सुखकारी |
भुवन तिनमें ज्योति तुमारी ||
जय जय जय सोनल सुखदाई |
चारन तारन अंबा आई ||
करुणा महीं तु वत्सल माता |
तुं ही सुख सत्य शांति दाता ||
कष्ट निवारण चारन देवी |
भकत जन गण सदा तुम सेवी ||
असुर सामे चंडी जवाला |
बालक पर मा होई दयाला ||
कोटी कोटी पूजहीं सब देवा |
चाहत ब्रह्म महेश तुज सेवा ||
तुम गुन सागर पार न पावे |
शेष शारद सत मुख गावे ||
जो भकत पाठ करे सत बारा |
मिटे कलेश दु:ख शोक अपारा ||
श्रध्धा सहित चालीसा गावे |
प्रेम भकित परम पद पावे ||
जगत नियंता ज्ञान विज्ञानी |
सिध्धि करो मम काव्य बानी ||
व्यापी सकलमें तुं हीं भवानी |
यथा मतिमें ऐति बखानी ||
बालक शरन मा निज जानी |
करहुं कृपा मा तु हीं भवानी ||
"आशानंद" बाल तुम्हारा |
छमहुं दोष सकल हमारा ||
चारन सुता जगमात, संकट हरहुं सुखरूप
जगदंब मम हृदय रहो, सोनल शांत स्वरूप
      श्री सोनल मात की जय
     श्री सोनल चालीसा समाप्त
कर्ता :- आशानंद सुराभाई गढवी
गाम- झरपरा ता.मुंदरा-कच्छ
मो-9824075995
टाईप :- वेजांध गढवी
            www.charanisahity.in
           वंदे सोनल मातरम् 

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