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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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1 अक्तूबर 2017

मीठी रे नजरुं आइ तमे राखजो चारण कवि आलभाइ

 *चारण कवि आलभाइ खेतशीभाइ गढवी रचित माताजी नी चरज* 
विस रे भुजाळी आइ तुने विनवुं
माडी करजे तारा छोरु उपर मेर रे
महामाया मोमाइमा...
मीठी रे नजरुं आइ तमे राखजो
आइ तारा मेरु ने हिमालय मोटा ओरडा
माडी विश्व रे आखामा तारो वास रे
महामाया मोमाइमां...
मीठी रे नजरुं आइ तमे राखजो
अमने हंमेस रे भरोसो भगवति आपनो
मां अमे तमने छोडीने बीजे क्यां जाइं रे
महामाया मोमाइमां...
मीठी रे नजरुं आइ तमे राखजो
मां बालुडा जाणीने जालजे बावडी
बस आचलुं कही करजोडे "आल" रे
महामाया मोमाइमां...
मीठी रे नजरुं आइ तमे राखजो
 *रचना -- चारण कवि आलाभाइ खेतशीभाइ गढवी* 
*गाम-- शेखडीया- कच्छ*
*ढाळ=बाकर मार्यो आइ ते बजार मां*
 *टाइपिंग -- राम बी. गढवी* 
*नविनाळ कच्छ*
*फोन नं. -- 7383523606*
 *वंदे सोनल मातरमं* 

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