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13 मार्च 2018

||रचना: मानव बोध || || कर्ता मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च)||

*|| रचना: मानवबोध||*
*||छंद:दुर्मिळा||*
*||कर्ता मितेशदान महेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च)||*

*रट नटत का नट झट के नफ्फट फट उ पावत पट्ट परे,*
*वट्ट रख्खत को वर पटक उ वित्त घट्टत मान सु दट्ट फरे,*
*अट्टकावत भट्ट सु भान समु भटकी खटपट्टेय काट खरे,*
*जद भुंघट का घुट घूंघट के,कूट भाखत मीत की वाट जरे,(1)*

नट जेम नाटक करे ने तो एने मन मा मनोबळ तो होय ज,के ए नही पड़े नीचे,परंतु गमे त्यारे घटना फरी साके,
डोरी तुटी पण सके,अने पड़ी पण जाय पट मा,
भाई एमज नफ्फट होय व्यक्ति ए नट समान ज छे,
गमें तेटलो मोटो बने तो एनु नफ्फट पणु समय आवता पड़ी ज जाय,

वट्ट गमे तेटलो होय,पण वर एटले थोडु ,वित्त (धन),
थोडू धन एना मान ने दाटी दे छे,
जो एनु ज्ञान अटकी जाय तो ए भांन भटकी ने कपट,अने एने खटपट ना लोह रूपी काट चढे,
माटे ज्यारे आ धरती माता ना खोळे जन्मया छीए त्या सुधी आ घट मा कपट ना घुटळा ने गाळी सारा मित्रो नी संगत मा सारा रस्ते  वळीये अने खराब वाट ने जारी दिए,

*फण दो कण माण कु खाण घणा गण दाण उको हरिपाण भणे,*
*चरिताण प्रमाण की ताण उदा'रण प्राण तणो परिमाण जणे,*
*अरगण अती अरमाण कतित बुराण मति धन बाण चरे,*
*जद भुंघट का घुट घूंघट के कूट भाखत मीत की वाट जरे,(2)*

घणा माणसो पोतानो उच्च मोभो कमाई ने पोते नाग नी फेंण जेवो वर्ताव करवा लागे छे,ए स्वमान ने मोटी मान नी खाण बनावी दे छे,ज्या फेंण अडी त्या डंस दे,अने एम समजे के अमे मोटा मोभा वाडा एटले ए तो अमारा पर ज हरि नों हाथ छे
पण,जे चरित्र नु प्रमाण ज्यारे देवानु आवे छे त्यारे एनो मोभो उतावळो होय छे,जेथी चरित्र अने मोभा बे वच्चे नो टकराव थाय तेथी एनु उदाहरण एना प्राण जणावे छे,मोभा ने कारणे एना दुष्मनो नु जे टोळु बन्यु होय ए टोळु अनिश्चित त्रास आपवानु प्रयत्न करि एने ऐनी खोटी बुद्धि ना बाण खवरावसे,
माटे,आ पण एक उत्तम व्यक्ति बनवा तथा सारा मित्रो नी संगत नु उदाहरण छे)


*भर पुर गुरुर कुरूर के तार  का सार का चामर ले समरे,*
*मगरूर न आदर चूर फितुर समीर का हुर भर्यो भमरे,*
*अकरूर प्रचुर लगो तन तुर चढे चकरूर पड़े वक्करे,*
*जद भुंघट का घुट घूंघट के कूट भाखत मीत की वाट वरे,(3)*

*द्रग आग पराग न पाग दगे लग दाग को राग न जाग रगे,*
*परीत्याग प्रयाग को साग सुराग कु भाग नीरोग अथाग भगे,*
*अनुराग विराग चिराग को धाग सगा दीग भाग सु भोग भरे,*
*जद भुंघट का घुट घूंघट के कूट भाखत मीत की वाट जरे,*(4)

*रति भोमती शोमत होत अति नत कु मति होवत ओदरते,*
*जति जात प्रमंकित अंकित वात गति सुत भात की गो सरते,*
*लत बात क्रति ऋत वित्त परांगत मोहत चित्त उदित्त लरे,*
*जद भुंघट का घुट घूंघट के कूट भाखत मीत की वाट जरे,(5)*

(कंजुसाई भर्यु मन लै तथा कुळी मति होय ते आखि जिंदगी खोटा विचार लै ए माणस  एमनो गुजारो करी जाय छे एमना जीवन नो कोई ध्येय हेतू होतो नथी)
(जति,अहीं,,कुळी विचार धारा धरावनार इंद्रियोने वश करि लेनार व्यक्ति,एवा व्यक्ति पोताना खोटा शोख तथा एमना बदनामी नाम ने कारणे पोताना समाज तथा कुळ ने पण निचो प्रमाणित करावे छे,एमना भाइयो सगा व्हाला नी वातो लोकोनॉ मुख पर रही जाय,अने आंखे पण चडी जाय छे के आ व्यक्ति आनो भाई के बंधु(मित्र) छे,)
(कोई व्यक्ति ने लत लागी जाय रुपिया,धन नी तो एनो व्यवहार अने काम ऋतु  नी जेम बदलता जाय छे,अने अंत मा व्यक्ति हैये थी उद्धम बनी जाय छे जे रुपिया ने माटे बीजा व्यक्ति नों जीव लेवा पण तैयार थई शके छे,)
(माटे भाई सुख संसार मा जीववू होय तो आ धरती नॉ खोळे जन्मया तो सारा मित्रो तथा सारा व्यक्तिओ नो संगाथ करी सारा काम नु प्रतीक बनता जाइये)

*🙏---मितेशदान(सिंहढ़ाय्च)---🙏*

*कवि मीत*

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