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10 मार्च 2018

|| ताप ना दोहा || || कर्ता: मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च) ||*

आ तो भर उनाडो छे अने आ सूर्यजी ना तेज नों पार नथी,तो आपडी आवि हालत छे तो बिचारा मुक जीव नी शु हालत  हसे,!?
तो अत्यारे ए बाबते विचार करता शब्दो ने दोहा रूपी निरूपण आप्यू

धन्यवाद
🙏

*|| तरवराट्यो ताप ||*
*||कर्ता: मितेशदान महेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च) ||*

*तरस्यू लु ए तनडु,ठंडक नों नै थाप,*
*मीत तणा आ मलकमा,तरवराटयो ताप*

*ए,सी पंखे ओथमा,बेसे धनिकों बाप,*
*मीत तणांआ मलकमा,तरवराटयो ताप,*

*गरीब पशुडा गाममा,भाभरता थर भाप*
*मीत तणा आ मलकमा,(केवो)तरवराटयो ताप*

*रहेम जीव नई रेतु,सुरज दियों शु श्राप,?*
*मांड्यो जगमे मितराज,(का)तरवाराटयो आ ताप*

*पादर लीमड़े पौढता,जपे निंद्राय जाप*
*मीत तणा आ मलकमा,तरवराटयो ताप*

*तरह्या खगला तरफड़े,पाणी ने माथे पाप*
*मेले जगमे मितराज,(केवो)तरवराट्यो ताप*

*🙏---मितेशदान(सिंहढ़ाय्च)---🙏*

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