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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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2 अक्तूबर 2018

कच्छना झरपरा-नविनाळ गामना दरीया कांठे बिराजता आइ भराडी माता

💐 *कच्छना झरपरा-नविनाळ गामना दरीया कांठे बिराजता आइ भराडी माता* 💐

कच्छ नी केसरी वीरभुमीना कांठाळ प्रदेशनुं झरपरा गाम देवीपुत्रोनुं मोटु गाम छे.आ गामना दक्षीणे रत्नाकर सागर घुघवे छे एना कांठे सागर कांठाना संत्री भराडीमां जेमना पालक पिता झरपरा गामना चारणोना गोर माणेक भराडा हता.अने मालधारी चारण कन्या नु नाम कमश्री हतुं श. आ चारण‌आइनी इतिहासकथानुं आपणे अवलोकन करीए.

कच्छ नो कांठाळ प्रदेश स्वर्ग जेवो लीलोछम छे. हरियाळी वाडी,खेतरो साथे सागरकांठाना ढुवाना जंगलो अने सागर कांठे सुंदरवन जेवा चेरना जंगलोथी आ विस्तार शोभे छे.एमां मुंदरा तालुकाना झरपरा अने नविनाळ गामना दक्षीणे नागमती नदी अने समुद्र नो ज्यां संगम थाय छे तेनी पश्चिमे ढुवा नामनी रखाल आवेल छे. एमां रेतीना ढुवानी बनेल एक मोटी टेकरी छे. त्यां बिराजमान छे सागरकांठाना रक्षक, आस्थाना प्रतिक श्री ब्रह्माणी माताजी.

आजथी अढीसो वर्ष  पहेला कच्छ अने सौराष्ट्रमां सागरकांठेथी मोटी अवरजवर हती.घणां लोको दरीया वाटे सौराष्ट्र प्रदेशमां जता,तो घणां काठीयावाडमांथी सागर कांठे कच्छ थ‌इ अने सिंध तरफ जतां. एवा एक समयमां काठियावाड़ मां काळझाळ दुष्काळ पड्यो अने साथे प्लेग नामना रोगनी महामारी, तेथी काठियावाड़ ना चारणो, आहिरो, रबारीओअने भरवाड जेवा मालधारी कोमो पोताना माल-ढोरने हांकी सिंध तरफ जवा लागी हती. ते समये सिंध, सिंधु नदीना कारणे कायम लीलोछम रहेतो हतो.एमां एक पशुपालकोनो मोटो समुहनो पडाव कच्छनी कांठाळ पट्टीमां दरिया कीनारे आ ढुवा वच्चे ज्यां पाणीनी पण सगवड हती त्यां पड्यो.गायो, भेंसो, घेटा-बकरा, आसपासनो लीलोछम घास चरवा लाग्या.तेथी मालधारीओ पण बे-त्रण दिवस पोरो खावा अहिं मेलाण कर्युं.

एकाद बे दिवस थाक खावा रोकाया परंतु अचानक तेमना समूहमां प्लेग नामना रोगे देखा दीधी.अने केटलाक पशुपालको मृत्यु पण पाम्या.आवा समये मालधारीओ पोताना मालढोर अने मांदा लोकोने भगवान भरोसे छोडी चाल्या जतां अथवा एकलदोकल कोइ तेमनी सेवा-श्रुसुषा करवा रोकातुं.पशुपालकोना आ समुहमां एक नवेक वर्षनी मालधारी कन्या ने आ रोग लागु पड्यो.मरणशैया पर पडेली वहाली कन्या ने छोडी जतां रहेवुं मां-बाप नी इच्छा नहोती.परंतु रोगने कारणे मालधारी समुह चालतो थयो हतो.ते समये रोगग्रस्त कन्या छेल्ला श्वास लेती हती.तेथी थोडीवारमां ज मृत्यु थशे एम मानी मालधारीओ उचाळा भरी चाल्या गया.पाछळ रह्या मात्र तेमना पथ्थरना चुलाना अवशेष, ते समये झरपरानो एक ब्राह्मण अहींंथी नीकळ्यो.जोयुं तो मालधारी चाल्या गया होवा छतां रेतीना ढुवामांथी बापा,बापा एवो क्यांकथी अवाज आवतो हतो.अवाजनी दिशामां चालता भुदेवे जोयुं तो रेतीमां अर्ध दटायेल नवेक वर्षनी रुपरुपना अंबार समी कन्या बोलावी रही हती.

प्लेगना रोगमांथी थोडा अंशे मुक्त थयेल कन्या ने माताजी नी प्रसादी समजीने आ ब्राह्मण पोताना घरे तेडी गयो.तेने लाडकोडथी उछेरी, आ कन्या झरपरानी अन्य चारण कन्याओ साथे एवी भळी ग‌इ,बधाने भुदेवने मडेल कन्याने बदले झरपरामां ज जन्मेल चारण कन्या जेवी लागती छतां आ मालधारी कन्याने भरवाडनी कन्या तरीके भरवाडी अने पाछडथी भराडी ओळखवा लाग्या.आ कन्यामां तेजस्वीता हती.दैवि शक्ति हती.कन्या सोळ वर्ष नी थतां तेना पालक पिताने एना लग्न करवानी चिंता थती हती.परंतु तेनी जाण ज्यारे भराडीने थतां तेणे पालक पिताने चोख्खुं कही दीधुं के, मारो सगपण करसो नहीं, हुं थोडा ज समयमां पाछी जवानी छुं अने मारा मृत्यु पछी तमे मने ज्यांथी हुं मळी हती त्यां ज मारा अंतिम संस्कार करशो.एक अजाणी कन्या पण एने आटली मोटी करेल वहाल वरसावेल कुटुंब मा दीकरी बनी हळी मळी गयेल आ देविकन्यानी वात सांभऴी पालक पिता खुब ज दु:खी थया. थोडा समय बाद आ लाडकी कन्या दुनिया छोडी, मां-बापने रडतां मुकी चाली ग‌इ.रडतां रडतां परिवारजनों तेमनी इच्छा अनुसार सागर कांठे जे टींबा परथी आ कन्या मडी हती त्यां एमना अंतिम संस्कार कर्या. अने तेमनी स्मृतिमां नानकडो ओटलो बनाव्यो. वार तहेवारे ब्राह्मणो अने पशुपालको नैवेद करवा आवता आ क्रम आज सुधी जळवायो छे.

ए वखत कच्छ ना महाराओश्री आ ढूवा नामनी रखालमां सुवरनो शिकार करवा आव्यो ते समये अहिं गाढ जंगल हतुं. झरपरानी सीममांथी ज शिकारीओ जंगली प्राणीओ पाछड दोडता आखरे प्राणीओ आ ढुवा नामनी रखालमां संताइ जतां, आजे कच्छ ना रा बावा खुद सुवर पाछड दोडता दोडतां त्यां आवी चड्या हता सुवर घडीकमां देखातो तो घडीमां अलोप थ‌इ जतो. अचानक सुवरे देखा दीधी. एटले रा बावाए तरत ज बंदुकनुं निशान लीधुं. परंतु आ शुं? गोळी छूटे ते पहेला ज आकाशमांथी गेबी संदेश संभडायो. 'रा छोडीदे आ निर्दोष जानवरने ए मारा शरणमां छे,अने हवे तने आ टींबानी आसपास शिकार करवा नहीं द‌उं.' राजाना हाथ थंभी गया, गोळी न छुटी, परंतु दैवीसंदेश सांभडी राजाना रोमरोममां आनंद थयो. एतो तरत ज पाघडी उतारी टींबाना स्थानपर गयो अने माताजी ना दर्शन कर्या. पछी आसपास कोइने पण शिकार न करवानी राज‌ आज्ञा संभळावी.नानकडा आ रेतीना टींबापर माताजी नी मुर्तीनी स्थापना करी.

आजे आ वातने वर्षो वीती गया छे. ए स्थान पर आजे सुंदर मंदीर छे. मालधारी अने आ विस्तार नो लोको दर्शन करवा आवे छे.
भराडी ब्राह्मणोना घरे मोटा थयेल एटले ब्रह्माणी माताजीना नामे पण ओळखाय छे. माताजी बाळ स्वरुपे पुजाय छे. आ स्थान प्रवासधाम तरीके विकसी शके तेवुं सुंदर स्थान छे.सागर किनाराना संत्री समान आ स्थानमां बिराजता शक्तिमाता भराडी माताजी ने अमारी भाव वंदना..

*खास नोंध = झरपराना भुदेवनुं नाम माणेक हतुं ते जोशी हता अने तेमनी अटक भराडा हती. तेथी माताजी नु नाम भराडीमां पड्युं छे.माताजी नुं मुळ नाम कमश्री हतुं अने माताजी पोते चारण कन्या हता. आजे अमुक लोको ब्रह्माणी माताजी तरीके ओळखावे छे ते हकीकतमां चारण माताजी छे*


*खास नोंध आ पोस्टमा टाइपिंग भुल जणाय तो नीचे आपेला फोननंबर पर जाण कर्या सिवाय पोस्टमां छेडछाड करवी नहीं शेर करजो पण वातनी जाणकारी न होय के अधुरी जाणकारी होय नंबर पर संपर्क करवो*

💐 *भराडी माताजी ना जीवनवीसेनी कथा कच्छ झरपराना वतनी श्री आशानंदभाइ नी "चारण आइ परंपरा" नामनी बुकमांथी टाइप करेल छे भुलचुक सुधारीने वांचवी* 💐

🌹 *टाइपिंग= राम बी गढवी* 🌹
*नविनाळ-कच्छ*
*फोन=7383523606*



💐 *वंदे सोनल मातरमं* 💐

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