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23 फ़रवरी 2019

|| सूर्यवंदना छप्पय || || कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*||रचना : नित्य सूर्यवंदना ||*
*||कर्ता : मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||*
*||छंद : वीर छप्पय ||*

(3-2-2019)

*प्रत अळेय धर प्रगट,सुष्म किरणा पड़ सरपट,*
*प्रत अळेय धर प्रगट,झटक निज हस्तक झटपट,*
*प्रत अळेय धर प्रगट,निरंजन नवदिधित नुर,*
*प्रत अळेय धर प्रगट,सप्तरंगा भर महि सुर,*
*हरदम हयात सुर हाटके,कट तिमिर जात मूळ कंदने,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,मित नमत हे कश्यप नंदने,*

हे सूर्यनारायण,आ धरती पर सर्व प्रथम तमे उदय थाओ छो,अपना सात रंगों थी भरपूर महत्वकांक्षी किरणों अमारा जिव ने,श्वासने,तथा शरीर ने सुवासित करे अने एक प्रफुलित शक्ति प्रदान करे छे,आप नित प्रगट थता आप जेम व्यक्ति आळश मरोड़ता हाथ झाटके एम आप उदय थता ज् किरण ने झाटकी धरती पर नाखो छो जेथी अमारा देह ने शक्ति मळी रहे,हे निरंजन देव तमे अमारा जिव ने तारो छो,एवा हरदम हयात,तमारा हकोटे रात्रि नो अंधकार मूळ थी दूर थई जाय छे एवा सर्वप्रकाश देव ने मारा नित्य वंदन

(4-2-2019)

*चढ्यो आभ चमकार,चरण पथ तप सर चढता,*
*चढ्यो आभ चमकार,गरण दल गढ़ेय गढ़ता,*
*चढ्यो आभ चमकार,रूप सुर  सांज रणंके,*
*चढ्यो आभ चमकार,डाळ पंखी रव डणके,*
*पृथ प्रौढ़ भोर पर प्रतिकजे,दृढ़  दुड़ीयंदो अम देव है*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,खर  नमत ध्यान मित खेव है*

हे सूर्यनारायण,सवार नी व्हली प्रोढे आपना तेज नो चमकार आभै चड़ी,अमे जेम पगला भरिये तेम पगले पगले तमारो ताप वधारता रहो छो,(एक उद्देश्य सिद्ध करो छो के जेम आगळ वधिये तेम जीवन मा पण घणा ताप वधता रहेशे,)अने  सांजे पड़ता वृक्ष पर थी पंखीना कलबलाट आपना ढळता नी साथे काने पड़े अने  केसरी संध्या नी आरती ओना नाद रणके छे एवी मनोरम्य कीर्ति ना आधार तमे छो,याया धरती पर एक नियम नु प्रतीक आप बण्या छो,एवा देव ने मारा नित्य नमन

(5-2-2019)

*मिहिर तेज मकरंद,सृष्टि सुर मधु सरित सम,*
*मिहिर तेज मकरंद,कटे विष अशुध कालकम,*
*मिहिर तेज मकरंद,पखाळे परम ज्ञान पथ,*
*मिहिर तेज मकरंद,रिदय घर वहत तेज रथ,*
*भ्र्मरा गुंजार सम तप भर्यो,अर्क उजागर अंगसे,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,रवि दियण नमत मित रंगसे(3)*

हे सूर्यनारायण,आपनु तेज मधुरु छे, मकरंद(भमरा) जेम फूल माथि रस पान करे इम आपना तेज आ धरती पर ना रोग नु निवारण छे,आ धरती पर रहेल अशुध वायु ने आपना  तेज निवारे अने शुद्ध जीवन प्रदान करे जे कारण मनुष्य जीवी शके छे,आप परम ज्ञानी छो जेम रथ नु पैड़ू चालतु रहे एम् आपना रिदये थी तेज नो व्हाल वरस्तो रहे अमपर इटली विनंती आप देव ने,एवा मिहिरदेव मकरंद ने मारा नित्य नमन

(6-2-2019)

*कुदरत रूप कमाल,ज्वाल सूरजण तु जग्गे,*
*कुदरत रूप कमाल,भोर निरखे नभ भग्गे,*
*कुदरत रूप कमाल,अर्क साक्षात अजायब*
*कुदरत रूप कमाल,सर्व पर एकज सायब*
*नव नाथ लोक त्रि नर नमो,सुर कुदरत देव समित है*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी प्रताप,मन जप्यो नाम सुरमित है*

हे सूर्यनारायण,आ कुदरत आपे बनावी छे पण केवो कमाल केवाय,केवु आश्चर्य केवाय के समग्र ब्रह्माण्ड मा आप एक ज् एवा देव छो एवी शक्ति छो के जे1 सर्वप्रकाश विश्व,आ अखिल ब्रह्मांड ने प्रकाश आपे छे,आ सर्व नो एक ज् सायब(ईशवर,मालिक) छे इ तू छो नारायण,आपने त्रण लोक ना नाथ,देवो तथा नर नमन करे छे,इवा कुदरत रूपी देव ने मारा सतनित्य  नमन,

(7-2-2019)

*जगत वंद कर जोड़,क्रोड  किरपा तप करणा,*
*जगत वंद कर जोड़,तोड़ षडरिपु मनतरणा,*
*जगत वंद कर जोड़,थाट शक्ती कर थोभे,*
*जगत वंद कर जोड़,शान प्रतिमा नभ शोभे*
*उपमा अनेक तुज अर्कनाथ,वंदु विख्यात तुज वात है*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,गुण नमन किये मित गात है*

हे सूर्यनारायण,आ जगत तने हाथ जोड़ी वंदनं करे छे,ते अमारा पर केटली कृपा करी,एने वर्णवि नथी शकता,मनुष्य मन ना छ् विकार आप थकी ज् दूर थई शके छे एना सिवाय एने कोई  दूर करी शकतु नथी,आपनी भक्ति तप थी मन एना योग्य कार्यवर्तने चालु रहे छे,हे नारायण आपने मा जगदंबा इ एक थाटे रोक्यो हतो त्यारे आप थोभी रह्या,आपनी मदद वगर दिवस न हाली शके क़े न रात, आपने मारे शु उपमा आपवी ए ज् हु नथी विचारी शकतो आप निराकार छो एवा विख्यातिदेव ने नित्य नमन

(8-2-2019)

*किरण छोड किरपाण,उगार्यो उर धर आंजण,*
*किरण छोड किरपाण,मळ्यो हनु गुणविध माजण*
*किरण छोड किरपाण,सकळजग तुज पर समता,*
*किरण छोड किरपाण,नियत नित हर सम नमता*
*सुर शिव समान सज शोभतो,महा मांडवराय महान है,*
*पट निहर प्रोढ़ अवनीपरे,वंदन क्रिपाण मित वान है*

हे सूर्यनारायण,आप केवा कृपाल देव छो,आपने हनुमान फळ समजी खावा आव्यो छताय आप क्रोधायमान न थ्या,सदाय मन ने वश मा राखनार देव छो,आपे हनुमान ने ब्रह्माण्ड मा ज पथ पर तमारा रथे साथे बेसाड़ी दरेक ज्ञान पुरु पाड्यू,जेम एक मा पोताना पुत्रने जणे  एम जण्यो,आ जगत तमारा पर निर्भर छे सर्व तमारा आधार पर ज रहे छे जेम शिव ने नमें एवी नामना तमारी पण छे एवा देवोना देव समान सूर्यदेव ने मारा नित्य नमन,

(9-2-2019)

*आदि नाथ अदभुत,काल व्रेह्मण्ड अजर कटे,*
*आदि नाथ अदभुत,अड़ाभीड़ थंभ अमर अटे,*
*आदि नाथ अदभुत,अळ्या धर सुता अपावी*
*आदि नाथ अदभुत,खंत नित नजर खपावी*
*अदभुत नाथ अविनाश अर्क,दिन हर गण करत दयालदनि,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे, बस नमन कृत मित न्याल बनी*

हे सूर्यनारायण,आप आदि अनादि अद्भुत देव छो,ब्रह्मांड नु समय चक्र आप थकी छे,आप अजर अमर छो,जीवन अने मृत्यु वच्चे नो अड़ाभीड़  थंभ छो,ज्यारे सृस्टि नी रचना करवानी हती त्यारे आप तैयार थ्या,आपे पोताना अड़धा अंग ने छुटु करि आ सृस्टि रची,तेथी आपनी पुत्री सामान छे आ धरती अने,नित्य तमे आ धरती ना बाळको पर नजर खपावी राखो छो के कोई दुखी तो नथी ने,इवा नित्य निरखि देव ने मारा सत सत नमन,

(10-2-2019)

*आज वसंती आभ,रचे थर आभा रंजन,*
*आज वसंती आभ,मचे सुर पंचत:  मंजन*
*आज वसंती आभ,जरे थळ वायु अग्नी जळ*
*आज वसंती आभ,वसे तुज दल बन वमळ*
*महा पंचतत्व सुर महाराण,थर उमट्या बन जीव थंभ है,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अर्क अवल मित आरंभ है*

हे सूर्यनारायण,आज वसंतपंचमी छे,आज ना दिवसे आपे अनेरु  वातावरण रच्यु छे जाणे आभ मा एक सुगंधि वातावरण फेलायु होय,आपे  पंचतत्व ने वश मा कर्या छे जे धरती पर मनुष्य जिव ने सचववा राख्या छे,आप हसो तो आ जिव सृस्टि रहेशे,माटे सर्व जिव नो अवल आधार आप ज् छो,एवा सर्वप्रथम देव ने मारा नित्य वंदन

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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