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17 अप्रैल 2019

|| सूर्यवंदना छप्पय || || कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

(11-4-2019)

*मिहीर भरण पद मृग,धरण सुर करण वरण धन,*
*मिहीर भरण पद मृग,जरण हर पाप हरण जन*
*मिहीर भरण पद मृग,तरण कोटि जिय तरी तन*
*मिहीर भरण पद मृग,शरण तव नमें सकलजन*
*पद भरण अरण जग पेखतो,दन देतो परिमल दान*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,धर नित्य नमण मित ध्यान*

(12-4-2019)

*करा ताप आ करा,खरा दल  सरा नभ खरा,*
*करा ताप आ करा,खरा जल तरा वल खरा,*
*करा ताप आ करा,खरा पल वा अतल खरा,*
*करा ताप आ करा,खरा कटी काल पल खरा,*
*हर खरा समय तुज पर हरा,दन ताप्या तम सम देह*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,नित वदत कर्म मित नेह*

(वल- झाकळ)

(13-4-2019)

*सुद्रढ मनन सकार,वरण गुण मती विजयवर,*
*सुद्रढ़ मनन सकार,प्रती अवकाश प्रलयकर,*
*सुद्रढ़ मनन सकार,उद्गामन आभ  अजयमर*
*सुद्रढ़ मनन सकार,भोर प्रकृती भवनभर*
*नभ मंडल निरखीय तु नवो,निर्मल मन सुद्रढ़ नाथ*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अविरत मित रह मम आथ*

(14-4-2019)

*चैत्र सूद नोम(रामनवमी)*

*रदय राम सम राण,राम  सुर जाप तप्यो रज,*
*रदय राम सम राण,तृप्त दल अहम मौन तज*
*रदय राम सम राण,सुरापत मोभ सुप्रत सज*
*रदय राम सम राण,गुरबअत जरत प्रगट गज*
*रीत राम नोम रा राणसु,प्रत हेत पुरातन पुंज*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी पटे,कर प्रीत लगे मित कुंज*

(15-4-2019)

*किरण क्रोध कैलाश,जोग महाकाल जुवारु,*
*अखिल ब्रह्म पर आश,पंचमुख प्रेम पसारु*
*देव दिग्गज दलनाथ,महा ममता सुख मारु*
*सहू पर शाखी सुर,असुर पर आप उदारु*
*है नाथ नाम नारायणा,नित वंदन न्यारू नाम*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,धन मित गुण तोळा धाम*

है नारायण,आ विश्व मा देवोनो देव महाकाल कैलाश पर बिराजमांन छे,त्यारेय तु हयात,आ विश्व नो रचनाकार ब्रह्मा,जेना पांच मुख हता(एक मुख नो शिवजी ए नाश कर्यो हतो) एवा समयना हयाती,मोटा मोटा देव दिग्गज पण तमारा वंदन करेछे,मा जगदंबाओ ना तमे शणगार बनी एमनी लोबडीओ मा आभला बनी चमक्या,दरेक परिस्थितिमा आप शाख पुरी,असुरो पर पण आप उदार बनी जीवन व्यवस्थीत जीववानु शिखवाड्यू,एवा उदारी देव,नारायण नामी नाथ तमारा नाम हु नित जापु अने हु नित्य जापतो रहू एवा नारायण ने नित्य वंदन

(16-4-2019)

*आभ धजा अरमान,सुरज रज आप सु रंगी*
*आभ धजा अरमान,सुहावत टेक सुचंगी*
*आभ धजा अरमान,विरल विद विश्व विराजत*
*आभ धजा अरमान,सत्य थर आप सजावत*
*अम लोक धरा पद आपना,तु घूमट पताका  तेज*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,सुख मित बनियो अम  सेज*

(17-4-2019)

*झलक व्योम जळहळा,करण दल कवच कुंडळा,*
*झलक व्योम जळहळा,ठरण बळ प्रबळ खळ थळा,*
*झलक व्योम जळहळा,तखत पर टीखळ कु टळा,*
*झलक व्योम जळहळा,कोइ नव जाण तव कळा*
*प्रति खेल पलक परमाणनो,तू खेलावण तमहरा*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,धन गुण मित पारख धरा*

(18-4-2019)

*भय नाशी भवनाथ,भाण भुमिका भत भारी,*
*भय नाशी भवनाथ,भजु नित भरत भू धारी,*
*भय नाशी भवनाथ,भष्म पर भेख भितारी*
*भय नाशी भवनाथ,भजे सव भगवाधारी*
*भय भंजण भगवो भाणलो,भजता मित भावे भेद*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,वण तमो विज्ञानी वेद*

(19-4-2019)

*दल पर लगे न दाग,राग तपतो रग रचियो,*
*दल पर लगे न दाग,शरण तुज पर जो सजियो,*
*दल  पर लगे न दाग,जीवण संजोग जगावे,*
*दल पर लगे न दाग, फंद कट बार फगावे,*
*गुरु ध्यान सुरज तुज में गढ्यो,दल पर मुझ लगे दाग,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,रचियो मित भगती राग*

(20-4-2019)

*प्रेम पिरसणों प्राण,रेम रूदिया पर राखे,*
*प्रेम पिरसणों प्राण,चरम हैया गुण चाखे,*
*प्रेम पिरसणों प्राण,द्रश्य दख  नवतम दाखे,*
*प्रेम पिरसणों प्राण,नित्य किरपा सुर नाखे,*
*दल वालप  दे दुडीयंडो,भव भोजन पिरसे भाण*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,रवि मंगल धन मित राण*

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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