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10 अगस्त 2019

|| सूर्यवंदना वीर छप्पय || || मितेशदान(सिंहढाय्च) ||

*🙏सूर्यवंदना🙏*

*(01-08-2019)*

*सत्यव्रती समजाव,चक्रवत क्या लग चाल्यु,*
*सत्यव्रती समजाव,हळ धरा पर शु हाल्यु,*
*सत्यव्रती समजाव,अंश तिहरा कही आव्या,*
*सत्यव्रती समजाव,वंश धर बीज सु वाव्या,*
*समय चक्र सत धरण सुरो,अरु चलण भविष्यत एह,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,व्रहतो मित एकज वेह,*

*(02-08-2019)*

*भर्यो भार भरपुर,धरा तणो आप धुरंधर,*
*भर्यो भार भरपुर,चौद ब्रह्मांड चर्योचर,*
*भर्यो भार भरपुर,आभे प्रति आस अमाणी,*
*भर्यो भार भरपुर,वखत हर वदे सु वाणी,*
*भर प्रवीण भारगुण भाणतु,आपत धर ज्ञान अपार*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,सद गुण मित साचो सार*

*(03-08-2019)*

*प्रगट्यो तेज पमाव,हरख हैडे हरखावो,*
*प्रगट्यो तेज पमाव,जगद्दीप ज्योत जगावों,*
*प्रगट्यो तेज पमाव,आप आभे अविनाशी,*
*प्रगट्यो तेज पमाव,अलख धणी आप उजाशी,*
*जो प्रगट्यो धर स्वर्ग जड़ी,जुग जुग जन्मावत जीव,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,नित नवीन लगावत नीव*

*(04-05-2019)*

*ओढ़ण वादळ आभ,तपी परताप तिहारो,*
*ओढ़ण वादळ आभ,सजी ढंकावत सारो,*
*जोढ़ण वादळ आभ,भयो अंधकार भुवनमें,*
*ओढ़ण वादळ आभ,विना तरु आभा वनमें,*
*छावे रूप काळो छावणो,ए तमस न खरतो तोय,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,हंमेश अरक मित होय*

*(05-08-2019)*

*कर्यो देव किरतार,सार संसार तार सर,*
*कर्यो देव किरतार,द्वार उद्धार उजल दल,*
*कर्यो देव किरतार,प्रगट हर प्राण प्रमाणित,*
*कर्यो देव किरतार,जगत मन भरीयो जाणित,*
*परखाव्यो तेज प्रमाण ते,दातार तुही जग देव*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,तुज पर उपकारी टेव*

*(06-08-2019)*

*पामर जीव पुकार,सुणो प्रतिसाद सुणावो,*
*दाखो नय दरकार,गजा अवगुण  गुणावो,*
*पाप तणा पड़कार,तपी भवसागर तारो,*
*आप बणी आधार,जीवन कुटध्यान सुधारो,*
*कलीयुग धरा पर कोणहवे,अम रक्षण काजे आवसे,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,गुण मित अवगुण गुणावसे*

*(07-08-2019)*

*परवळीया परिमाण,जगत जूनाणे जगता,*
*अगता नही अजाण,सहज कलीयुगे सगता,*
*रगता पोषत राण,भजा नर भगता भगता,*
*वगता चले वहाण,डहकता जे नर डगता,*
*हर वखत भजु नाराण हरे,जग चालण आपे जीव,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,नर हर मित पाम्यो नीव*

*(08-08-2019)*

*गुण कवियो नित गाय,सुरज तोळा सुरवरणा,*
*गुण कवियो नित गाय,भुवन अम भाग्य सु भरणा,*
*गुण कवियो नित गाय,पटाधर देव परमवर,*
*गुण कवियो नित गाय,उदय अविनाश उजागर,*
*नरईश भाव नवघण नमे,रवि जोग दिपावण रोज,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,मंगल गुण लावत मौज*

*(09-08-2019)*

*दलडे कदी न दाज,रखत परमेश्वर राजी,*
*समें भले सरताज,बिगाड़े जीवतर बाजी*
*तदे  बनी  सुर  तात,जीवन पर वेग जमावे*
*बल बुद्धि सह बात,समय सद परे समावे,*
*हर रूप नाथ क्रित हरत सभे,भव नाथ तणो ई भाव*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,रुषणो मित रखे न राव*

*(10-08-2019)*

*आप थंभ धर आभ,विणा कोही स्वारथ वसियो,*
*आप थंभ धर आभ,खलक थी कदी न ख़सियो,*
*आप थंभ धर आभ,चमक चित्तार चौराहे,*
*आप थंभ धर आभ,रज्जवट राख्य तु राहे,*
*नीस्वार्थ धरा पर नाखतो,तुज पुर्ण जीवो परकाश,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,अजरा मित नारण आश,*

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