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5 सितंबर 2016

रम्य सौराष्ट्रनूं रुप रमणी रचना :- बळदेवभाई नरेला

रम्य सौराष्ट्रनूं रुप रमणी

रचना :- बळदेवभाई नरेला

             *दूहो*

नारी तूं नारायणी भूनो तूं पर भार;
सरजी नहोत जो शामळे (तो)
चालत केम संसार,

    *छंद झूलणा*

रंग सूख दूःखमां सदा एक
राखती,
वदे अमृत समी मूखे वाणी,
जीव जेम लाज मरजाद ने जाळवे,
तपीने वदे नहीं कदी वाणी,
सासू ससरा तणी मेळवे चाहना,
बनावे कूटूंबनी फरज बमणी
शिल चारित्रना पाठ समजावती,
रम्य सौराष्ट्रनू रुप रमणी..(1)

शौर्य सौंदर्यमां धरा पर धैर्यमां,
जडे नहीं तेनो क्यांय जोटो,
कनक कूबेर भंडारनो कोय दि
क्षणीकनो मोह नव करे खोटो,
सत्यना सारमां अडग निर्धारमां,
भार वहेवारमां भूजा जमणी,
शिल चारित्रना पाठ समजावती,
रम्य सौराष्ट्रनू रुप रमणी..(2)

पतिनी प्रसन्नता हंमेशा
पाळती,
बाळ संभाळती बूद्धिबळथी,
अतिथी आरती सर्व सत्कारती,
अडग आवकारती अन्न जळथी,
ललाटे तेज लावण्यना लावती
नजरमां अमी नख शिख नमणी,
शिल चारित्रना पाठ समजावती,
रम्य सौराष्ट्रनू रुप रमणी..(3)

भमर भालो लई अरिने भेटती
समरमां अमर थई कमर कसती,
शिष स्वामी तणू संग लई चिता पर,
हिरण्य नेत्री चडे मूख हसती,
कहे *बळदेव*ए खमीरनो खजानो,
अमर ईतिहासमां नार अमणी,
शिल चारित्रना पाठ समजावती,
रम्य सौराष्ट्रनू रुप रमणी..(4)

            *दूहो*

आवी पदमणियू पाकता
वेधू वळ भरिया,
लवर मूंछाने लाडका,
करते केसरिया,

कर्ता: श्री बळदेवभाई नरेला

दिलजीत बाटी ना स्नेह सभर  जय माताजी

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