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3 अक्तूबर 2017

आई श्री मोगल चालिसा रचियता :- कविश्री प्रभुदानजी सुरु

आजे आसो सुद तेरस (ता.03-10-17) ऐटले आई श्री मोगल मांनो प्रागट्य दिवस  

                     || आई श्री मोगल चालिसा ||

घांघणीया देवसुर घर , मोगलनो अवतार .,
पाप प्रजाळण तुं मया , भूमि उतारण भार ......1
ओखा धऱ अवतार भो., घांघणीयाने द्वार ..
पिता देवसुर देवसम ., सुचारण पुरवार .........2
चतुरा चारण जातमां ,  मोगलरो अवतार ..
प्रेमे प्रगटी तुं मया , घांघणीयाने द्वार ........3
ओ्मकार बीज मंत्र तुं , सौर शक्ति स्वरुप ..
आधशक्ति तुं अवतरी , धरीयु मोगल रूप.......4
हिंगळाज आवड मया , करणी खोडल रुप , ..
शिवा अंबा चंडिका , काली रूप करूप ........5
धरा धरमने राखवा , आइ मोगल अवतार ,..
करवा रूडा कोडथी , चारण कनळ उध्धार .....6
समरो साचा दिलथी , आफत वखते आप ..
मोगल आवे मावडी , तुर्तज हरवा ताप .......7
मोगल एवा मावडी , अवतारी छो आप ..
स्मरण थाता मातनुं , जाय ताप संताप .....8
मांगल तुं मातेश्र्वरी , अळा परे अवतार ..
ओखाथी अवनी तणो , तुं पर माँ आधार ......9
सर्वोपरी समरथ मया , ओखा धर अवतार ..
चारण जात चतुरनी , तुं छो तारणहार .........10,
रवि उगमतो थंभीयो , आवड सरखी आप ..
वारुणी पल वारमां , बांये ग्रहीयो बाप .......11
मोगल मोटा महारथी , मोगल मोटा तात ..
मोगल मोगल समरता , अळगो करे आघात ........12
माँ माँ केंता आवीअे , जो नित तारे द्वार ..
तो तुं अंबा आपजे , पुरण प्रेम अपार .........13
क्रोधाग्नि एेक नयनमां , एेक नयन अमिरात ..
रीझे आपे राजवट , खीजे सघळु जात ...........14
दयावंत देवी वडा , तुं मोगल मां - बाप ..
तुं पालक पोषक सदा  ,  तुं टाळत भव ताप........15
सचराचर व्यापी मया , अणुं अणुंमा वास ..
परमाणुं पण तुं ज छे , विध विध तु ज प्रकाश .....16
जुग जुनी जगदंबिका , सृष्टी कारण रुप ..
ओखा धर प्रगटी मया , चारण कुळ अनु ........17
एेक हाथ त्रिशुळ पर , एेक हाथ तलवार ..
एेक हाथ वरदायनी , एेक शेष कूतकार ........18
भावे मोगलने भजो  ,  निशदिन राखो आश ..
दाढाळी दातार छे  ,  नाहि करे निराश .........19
आफत टाणे आवशे  ,  समर्ये थाशे सहाय ..
चोंपेथी वारे चडे , अे मोगल महमाय..........20
समर्ये थाती साबदी , तुं अावे ततकाळ ..
राखे मोगल रातदिन , छोरुनी संभाळ.........21
मोगल हैये आवता , सघळा जाय संताप ..
भागे मनना व्हेम सहु , भागे भयने साप .......22
मोगलना समरण थकी , पापी पावन थाई ..
अग्नानी ग्नानी बने , दु:ख दारीदर जाय ......23
मोगलमाँना समरणे , हैये थाय हुलास ..
अंतर उजवळ थाय ने , पुरण थाय प्रकाश ......24
तनया घांघणीया तणी , उमियानो अवतार ..
दैताने धमरोळवा , हाथ ग्रह्या हथीयार ........25
तनया घांघणीया तणी , कालि रुप क्रोधाळ ..
खडग खप्पर बेउ हाथमां , दैत्योनी अे काळ .....26
तनीया घांघणीया तणी ,  अंबा रुप अपार ..
पालक पोषक विश्र्वनि करुणाळी किरतार ......27
तनीया घांघणीया तणी , जान्हवी जोराळ ..
पापीने पावन करे , महिमा तुज विशाळ .......28
तनया घांघणीया तणी , नोधारा आधार ..
बुडताने बचावती ,  माँ तुं रक्षण हार ......29
घांघणीया अरू वांघीया , वळी चाटका साख..
त्रणे घरे तुं एेक रूप , लज्जा चारण राख ......30
गोरवीयाळे गोरवी , गीर काठानुं गाम ..
नरा चारणा नेहडा , मोगलना ज्या नाम ......31
तुं प्रसिध परमेस्वरी , मोगल मोगल मात ..
गोरवीयाळे गोरवी , ओखा धर प्रख्यात........32
अवनिपरे उजाळीयुं , गोरवीयाळी गाम ..
चारण धर्म निभावता ,  नवखंड राख्यु नाम .....33
बेठा दखणादा मुखे , निमवृक्षने छांय ..
छोरु पर राखत सदा , मीठी नजर महंमाय.....34
गोरवीयाळे गढवीर , नरा साखमां नाम ..
आवी उज्जवळ ओरडे , शोभाव्यु निज धाम ....35
पहाडो मोटो नेचडो , चारण समडा माय ..
मोगल मोटी मावडी , समर्ये हाजर थाय......36
पवाडे मोगल प्रथम ,  देवा दानव दंड ..
करे सवारी सिंह पर , खळभळता नव खंड....37
असरो पर हांके असि , देवा मृत्यु दंड ..
क्रोधारी कोपे खरी , रगदोळे रुंड मुंड ........38
पापीने पुरा करे , असुरोने पण आई ..
सत््नी तुं बेली सदा , राखत रुदीया माय......39
मोगल चालीसा तणो , निशदिन करशे पाठ ..
कोड बधा पुरा करे , ठीक वधारे ठाठ.........40
मोगल पासे मागणी , आखरनी छे आई ..
जनमो पाछा जोगणी , ( तो ) चारण तणी सवाई ....41
मोगल सौनी मावडी , राखे सेवक लाज ..
"प्रभुदान" प्रणवे तुंने , अंतर एेक अवाज ....42

टाईपमां भुल होयतो क्षमा करजो

रचियता :- कविश्री प्रभुदानजी सुरु
टाईप :-  मनुदान गढवी
         जय मोगल मां
       वंदे सोनल मातरम्  

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