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24 सितंबर 2015

गजब हाथे गुजारीने

कवि श्री पिंगळसिंहभाई पाताभाई नरेला भावनगर राज कवि रचित एेक कविता
         गजब हाथे गुजारीने ...  
     राग - काफी ताल :- दीपचंदी


गजब हाथे गुजारीने पछी काशी गयाथी शुं ;

मळी दुनियामां बदनामी, पछी नासी  गयाथी शुं.... टेक...

दु:खी वखते नहि दीधुं, पछी खोटी दयाथी शुं ;

सुकाणा मोल सृष्टिनां, पछी वृष्टि थयाथी शुं ; ....1

विचार्युं नहि लघु वयमां, पछी विद्या भण्याथी शुं ;

जगतमां कोई नव जाणे, जनेतानां जण्याथी शुं ; ...2

समय पर लाभ आप्यो नहीं, पछी ते चाकरीथी शु.
मळयु नहीं दुध महिषिनुं, पछी बांधी बाकरीथी शुं.....3
न खाधुं के न खवराव्युं दु:खी थईने रळ्याथी शुं ;

कवि पिंगल कहे, पैसो मुवा वखते मळ्याथी शुं ...4


रचियता :-  भावनगर राज कवि श्री पिंगळसिंहभाई पाताभाई नरेला
     संदर्भ :- पिंगळवाणी मांथी
➡ आ रचना मोकलवा बदल श्री धर्मदीपभाई नरेला भावनगर वाळा नो खूब खूब आभार

 पोस्ट टाईप :- मनुदान गढवी
     वंदे सोनल मातरम् 

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