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18 अक्तूबर 2015

भवानी पुकार अष्टक

.                    || भवानी पुकार अष्टक ||
.          रचना: जोगीदान गढवी (चडीया) कृत
.                         छंद : शैल भुजंग
.           (भुजंग=य य य य/ शैल= य य य ज )
हशे पुर्व ना जे करम मात काळा, वध्यां पाप वाळा बुढां यौन बाळा
हटे ना कटे आखटे जो उताळा, जप्ये नाम तोळां जले जेम ज्वाळा
अनादी तणीं आई आवी उगारो, धर्युं अंतरे ध्यांन मां ऐक धारुं
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||01||
पड्यो आकरो कां करो काळ परदो, दळोने खळो दोयलां देह दरदो
हवे हीबके ना चडे मात हरदो, भवां द्वार हुं बाळ जोलीय भरदो
थक्यो हुं  तक्यो वाट तोळी नीहारी सगत्त्ती करो भेर तो मात सारु
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||02||
नथी राह कोई  चिते आद चंडी, घणों घट्ट मां मां हतो हुं घमंडी
भवां दक्ख भारी पड्यांछे भ्रकंडी, द्रगे मात देखुं दीयो धर्म दंडी,
त्रहीमाम बोली पडुं पाय तोळे, हवे मात क्योतो हिमत्त हुंय हारुं
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||03||
तुंही तुं तुंही तुं बज्यो ऐक तारो, पड्या आर्त नादे भवां ना पुकारो
भमर ने चडावे दधी जग्ग भारो, बचावो ग्रही बांय ने काढ्य बारो
जगी खुब्ब जोयुं रुदु चिक्ख रोयुं, बच्या नुं नथी मात ऐकेय बारुं
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||04||
करी ने क्रीपा दोयलां दक्ख कापो, थडो मां तिहारो असां घट्ट थापो
जुवो भाव भोळे जपु मात जापो, धरम मात धारो  मति थी न मापो
पड्यो ऐकलो आतमो देह पिंडे ,रखे कोण रेमे मया ध्यांन मारु
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||05||
नमुं नाम नारायणी नित्य नामी, सुंणी साद छोरु तणां आव्य सामी
डणंकी दीयो बाळ ना दक्ख डामी, थरेर्या अमे मात ले हाथ थामी
शिवो ब्रह्म विष्णुं जपे जुग्ग जाता, धरे ध्यांन माता त्रणें लोक तारुं
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||06||
करे ना क्रीपाळी मया आंम मोडुं, दयाळी सदा आपनी पास दोडुं
करी बंध आंखो अने हाथ जोडुं, सदा संसयी शंक रा बंध छोडुं
विचारो विकारो तणी सब्ब घारो जगत्मात तोळा चरण मां जुहारु
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||07||
पड्या पंड विधीं घटे कैक घावो , रदे रेम राखी अरे अंब आवो
तजी योग निंद्रा धरम जांण धावो, बीये बाळ तोळो औ माता बचावो
नथी शब्द कोई नयन बस नीहारुं. उगारो उगारो उगारो उचारुं
जणेता जपुं दान जोगी जुबानी, पुकारुं भवानी तुने हुं पुकारुं ||08||
.                ईतीः श्री भवानी पुकार अष्टक
(नोंध: नविन प्रयोग होई ने काव्य द्रष्टी मां..दरेक अंतरा नी प्रथम बे हरोळ मां यती प्रमांणे चार प्रास तथा बाकी नी बे हरोळ मां अंत्यानुप्रास )
(भगवती भवानी आध्य शक्ती पराम्बा ने कोटी कोटी वंदन)


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