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11 दिसंबर 2015

वैदेही नी वेदना रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.                   || वैदेही नी वेदना ||
.                          राग : माढ
.            रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ
अग्नी परीक्षा में आपीती तोये.. छोड्यो कां मारो साथ रे..
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....टेक
अळगुं पितानुं आंगण किधुं..पडीयां तमारे पंथ
उरमां अमारे उछळ्या तेदी... कोड घणेरा  कंथ
हुंकाजे जग आखाय हारे..भडविर करशे भाराथ रे
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०१
काळुं टीलुं मुने चोड्युं कपाळे..मेंणलीयां नो मार्य
चौद वरह हुं पाछळ चाली..ओळखी ना ते आर्य
मैयर सैयर म्हेल मुकीने ..मे पकडी वन नी पाथ रे..
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०२
मांन थकी ऐ राजमां म्हालो .धोबी भर्या जे धाम
राघव शोक न राख रुदामां, नईरे लजावुं नाम
वेदना मारी आ वैदेही केरी..गाशे चारण गाथ
हवे हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०३
केंम ठगी मुंने भेजी कपीने..भोळी ने रे भगवान
लाय लगाडी लंकामां त्यारे ..जाळी न जोगीदान
आज पछाडुं  वनमां विदेही..मरवा माटेय माथ रे
हवे  हैयुं रहे ना हाथ रे..कांव नगणो थीयो तुं नाथ.....०४
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