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28 दिसंबर 2015

मनहर कवित रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.............मनहर कवित............
नरा अवसुरा पुरे पुरा देखा प्हाडा ऐक
चोराडा पवाडा चाळ मारु जग्ग मान है.
बाटीयांरी साख नेहे भांणेज भणंत चुंवा
परी तीन प्हाडा ओके पुरी पहेचान है.
सावरी बावरी मात आवरी उतार्यो आधो
तुंबडे खिलायो फुल तुंबेल की तान है.
सात कुल सोही वामे सोलाह समाई साख
वासे विसोत्तर जळहळे जोगीदान है.
पेहलो प्हाडो ऐटले, नरा - अवसुरा..
बीजो प्हाडो ऐटले ,चोराडा - मारु..
त्रिजो प्हाडो ऐटले, बाटी - चुंहवा..
अडधो प्हाडो ऐटले, ..तुंबेल ..के जेने
भगवती आदी आवडे तुंबडे फुल नी जेम खीलाव्यो...
आंम कुल सात साखा मां बिजी सोळ नो उमेरो थई ने..
त्रेविस ऐटले के विसोत्रय..जेने विहोतर नात कहीये छीये.
रचना : जोगीदान गढवी (चडीया) 9898360102

1 टिप्पणी:

gangdas gadhvi ने कहा…

Jay mogal. ..vihotar Nat ma kono kono samaves thay che a jamavu che mare ......Jay sonal

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