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17 मार्च 2016

शुं मांगु सोनबाई रचना - श्याम गढवी

.         शुं मांगु सोनबाई
.      रचना - श्याम गढवी
.      ढाळ - हवे प्रभु उगाडो द्रार

साखी - माग्युं तारा कने मावडी अने बमणुं आप्यु बाई
            श्याम कहे हवे आई हुं शुं मांगु सोनबाई

शुं मांगु सोनबाई तें तो अढळक आप्यो आई
           हवे माडी शुं मांगु सोनबाई....
फुलडा तारा बागना माडी अमे फोरमुं थी ओडखाई जी
चारण बाग-बगीचा केरी मालीक तुं छो आई
            तो हवे माडी शुं मांगु सोनबाई....
वर्ण अढार मां ज्ञाति चारण वेद मां वंचाय जी
गावे हरीगुन जगने गवरावे जेनी शारदा करे सहाय
        तो हवे माडी शुं मांगु सोनबाई....
चारण चित थी चाहे तने तारा नामथी मलकाय जी
सोनल शकित नाम समरता शुध्ध क्षमता समाई
            तो हवे माडी शुं मांगु सोनबाई....
काग जेवा कविओ मळया अमने ईशरनां अवतार जी
"श्याम" कहे सुरज रोकयो जेदी ऐवी आवळ आ कुळमांय
          तो हवे माडी शुं मांगु सोनबाई....

रचना :- श्याम गढवी साहित्यकार मोटा करोडीया-कच्छ
           9586584565

टाईप :- www.charanisahity.in


      वंदे सोनल मातरम्  

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