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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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23 जुलाई 2016

प्रस्तुति कवि चकमक

आलम मारा अवगुणा,
साहेब तुज गुणाह !
बुंद व्रषा रेणुकल,
तारा न लाघे ताह !!

आ दोहराने याद करवो, सौने गमे ऐवो छे ऐना रचयितानी बाबतमां कंई पण कहेवुं आपणुं सामथ्यॅ नथी, पण आपणां ऐ  चारण कुळमां जन्मया छे ऐ आपणां माटे भारोभार गौरव छे. बस अागळ वात करतां पहेला प्रात: स्मरणीय ' ईशरापरमेशरा ' ने वंदन वारंवार..
भतृहरि कहेता हता के हुं कांई जाणतो नथी, परमात्माना सामथ्यॅनो विचार करतां मारो जाणवानो अहंकार ओगळी गयो, खरेखर भतृहरि महान ज्ञानी भकत हता, ऐम छतांय आवुं कहे छे.
ईसरदासजीना गुणो ऐटला हता के स्वयं जगतनो आघार ऐमने मळवा आव्या हता.

       🌺जय माताजी🌺

प्रस्तुति कवि चकमक.

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