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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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5 जुलाई 2016

मारी मोज छे अलगारी

मारी मोज छे अलगारी

मारी मोज छे अलगारी हुं मोज मां रहुं छुं
नशा मां रहुं छुं तो पण होश मां रहुं छुं

नित्य प्रभात उठुं छुं प्रभु ना स्मरण साथे
करी आराध ऐनो ऐनी खोज मां रहुं छुं

हताशा-निराशा तो संसार ना नियम छे
हुं रहुं छुं जीवंत अने जींदगी जीवुं छुं

होय खिसा खाली तो पण क्यां अफसोस छे
मन भरीने प्रेम नी दील थी मदीरा पीवुं छुं

गीता कुरान वेद धर्म जाणतो नथी कशुं हुं
मानव अवतर्यो छुं "देव" मानवता भणुं छुं

✍🏻देव गढवी
नानाकपाया-मुंदरा
       कच्छ

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