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30 अगस्त 2016

करणी मां का छंद :- ✍कर्ता कवि "खेतदान दोलाजी मिसण"

-----------करणी मां का छंद ---------
📕छंद जात रेणंकी
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✍कर्ता कवि "खेतदान दोलाजी मिसण"
-------------☆☆☆☆----------------
                 दोहा
                --------
आप अजोनी ओपनी,माजी मरूधर मांय।
देवी धन देशनोक में,मेहासधु महमाय-----(1)
असरण सरणो आपरो, सेवग करणी साय।
चौसठ भेळी चोमणी, रमणी जंगल राय---------(2)
जग धरणी करणी जके, हरणी दुख हजार।
तारण तरणी त्रेगुणी, करणी जे कर वार-------(3)

               छंद रेणंकी
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(तो) करनिय घर-घर मंगल करनिय, समरण वरणिय प्रात समे।
असरण सरणीय धरणीय उपर, गगने गवनिय पाप गमे।
वरण विसोतर वाहर करनीय, भरणीय संपत रिद्धि भरो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो।
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो-------(1)टेक

अळ पर अवतार लियण जग आवड़, सतियल देवल मात सरू।
निरमळ घण रूप लिया तें नवलख, गणपत माता तुं गवरी।
उत्पत करण अमर घर आइयल, दिन-दिन जोंमण दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो ---------
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो-----(2)

झट-पट अवतार लियण जग जोंमण, अलख निरंजन आद सति।
झट-झट प्रगट अमट झट आइयल, घण छट चौसठ अगर गति।
कट-कट घट पाप विकट कट करनी, दिन-दिन जोमण दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो-----------(3)

उचरत मुख चार वेद घर अंबर, कर धर सेवग अभय किया।
रुम-झुम करतिय रतनाए कर-कर,लाखोंय नवलख रूप लिया।
उणतर सर मेर वसावण इन्दर, कविजन भल वाखोंण करो।
करगर सुण मदद रेम कर हर-हर संकट विघ्न हरो------------(4)

झळळक अति चुड़ निरमळ मुख गंग जळ, कळा अकळ गेंतोळ किएं।
शशियल भव उजळ वदन सुकोमळ, लोवड़ीयाळीय रूप लिएं।
मरूधर सर देव प्रबळ कळ मणधर, छन-छन माजीय मां समरो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो-------- --(5)

गणधर नव नाग सधंतर गणपत, सुरनर किन्नर जाप समें।
अगणित नित देव ओधारण अपसर, नरकत नारद प्रेम नमें
हरि-हर भ्रम प्रेम नमें सोय हरदम, धन-धन देवी ध्यान धरो।
करगर सुण मदद रेम कर हर-हर संकट विघ्न हरो---------'(6)

जळ-थळ सबळ वार कर जंगल, तन मन सरणो आप तणों।
अमरत भर वादळ करतुंय उपर, शक्तिय सेवक साद सुणों।
पर दुख भंजणी देवी परसुध, जग धर परचो हे जबरो।
करगर सुण मदद रेम कर , हर-हर संकट विघ्न हरो-------'-------(7)

तारण तरण भरण भय त्रिगुणी, भुवनंग पोषण तुं भरणी।
चोमंड वरण ओधारण चारण, कर-कर मंगल मां करणी।
सरणागत सरण देयण तुं शक्ति, कर धर मों पर दया करो।
करगर सुण मदद रेम कर, हर-हर संकट विघ्न हरो ------
देवी हर-हर संकट विघ्न हरो------(8)

         -----  कळस (छप्य) ----
विघ्न हरो वड़ देव, सेवगां नित साद सुणंता।
साय करे सूरराय , धाय झट ध्यान धरंता।
आद शक्त अवतार, वार कर लाज वधारे।
मेहासधु महमाय, आपरा दास ओधारे।।
देशनोक राय सरणो देयण,रिझीयें मात भेळा रेयो।
कर जोड़ दास "खेतो" कहे, किरतार रूप करणी जके।।

      अथ रेणंकी छंद सम्पूर्ण
-----------'''-------""--------

संकलन व टाइपिंग :- आवड़दान उमदान मिसण
ग्राम :-सोनलनगर (कच्छ)

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