.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

.

Notice Board


Sponsored Ads

Sponsored Ads

Sponsored Ads

7 अगस्त 2016

चारणी भाषामां प्रस्तुति कवि चकमक

चारणी भाषामां जे लालित्य तेमज मीठाश जोम अने जोश छे ते जगतभरनी भाषामां नहीं जडी शके, चारणी साहित्य अणमोल छे. गुजराती भाषानी चार पैसा किंमत आंकनार पर दया आवे छे आ भाषानी किंमत तो चार रुपिया जेटली छे.
छतां मोंधवारी, कपरा संजोगो राजकीय तेमज आथिॅकताना समयमां साहित्यकारो तेने माटे कंई करी शकता नथी, जीवन ज ज्यां मुश्केल बनी गयुं छे त्यां आजिविकाना साघनो मेळववा पाछळ मनुष्यने बघी शकित खचीॅ नाखवी पडती होय त्यां आ साहित्यनी प्रवृति कोण अने  केम हाथ पर लई शके ?
आ किमती साहित्य घीमे घीमे मृतपाय स्थिति प्राप्त करी रहयुं छे जे थोडा साहित्यकारो छे ते उंमरे पहोंची गया छे. परंतु युवावगॅने आ तरफ वाळवानो समय पाकी गयो छे. नहीं तो गुजरातनुं आ किंमती घन वेडफाई जशे.
चारणी साहित्यना उत्कषॅनी तैयारी करवानी जरुर छे, कोईऐ तो आ प्रश्न हाथ घरवो ज पडशे, साहित्यप्रेमीओऐ सेवाभावीओऐ अा कायॅ उपाडी लेवुं जोईऐ.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads