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16 अगस्त 2016

न देजो रचना :- देव गढवी नानाकपाया-मुंदरा-कच्छ

धरबायेल अगन राखी छे, हवे हवा न देजो
रक्तरंजीत छे लागणीओ वधुं सजा न
देजो

निर्दोष पणे संबधो मां धुम खर्चायो छुं
वध्यो छुं हवे नहींवत तो वधवा न देजो

मुक्त मन ना खेतर मां वावी हती लागणी
भले पाक गयो निष्फण तो लणवा
न देजो

सांचव्यु छे भीतर मां अमे दर्द अहीं अनहद
क्षणीक प्रेम माटे "देव"आंखोने झरवा न देजो

✍🏻देव गढवी
नानाकपाया-मुंदरा
        कच्छ

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