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22 अगस्त 2016

चारण महात्मा रचीत भजन :- उघाडोने द्वार

न *चारण महात्मा भक्तवर ईशरदासजी रचीत भजन*
*हरिरस स्वाध्याय सभानुं आयोजन करी अने सभानुं काम शरु करतां प्रथम भक्तवर ईशररदासजी नी समुंहगान स्तुंतिनुं गान करवुं अने भजन ( उघाडोने द्वार ) गांवु*
             *(अेक व्यक्तिना कंठे)*
उघाडो ने द्वार विनंती करुं हुं वारंवार
      हे जी प्रभु उघाडोने द्वारजी.....
माया मिटावी मुज घरेथी हुं आव्यो तारे द्वार ...
मनडुं आतुर छे मळवाने माटे नोधाराना आधार ...
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(1)
आवे पोताने आंगणे अेनो , कांईक करवो जोई सतकार ,
केम विवेकी विलंब करो छो रुक्ष्मणिना भडथार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(2)
मारे नथी कांई मागवुं प्रभु मने दियोने दिदारजी ,
दातार थई ने केम डरो छो क्षत्रीय कुळ शणगार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(3)
हजारो भक्तोना काम  कर्या छे.अेनो शुं करुं विस्तार जी
आज ईशरने दरशन आपी वरतावो जय जय कार ,
प्रभुजी उघाडोने द्वारजी.(4)
*रचियता :- महात्मा ईशरदास जी*
*टाईप.   :- http://charantv.blogspot.com*
                वंदे सोनल मातरम्

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