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4 सितंबर 2016

कवि श्री हिंगोळदान नरेला नी रचना

साथे साथे एवाज मूलायम कवि श्री हिंगोळदान नरेला ने पण याद करीये
         *मां*
तात हूंफ छाया छत्तर,
भूजा भणंता भ्रात,
स्त्री जीवन सहचारणी,
मंगल मूर्ती मात,
    *छप्पय*
मंगल मूर्ति मात साक्षात
शकित सरुपा,
मंगल मूर्ति मात करुणा
क्षमा  रु  कृपा,
मंगल मूर्ति मात विश्व वैराटे
वसती,
मंगल मूर्ति मात हरदम मधूरु
हसती,
पाळे पोते प्रेमथी शूध
सात्विक सर्मपण,
छोरु काज संकट सहे
कहे *हिंगोळ* मां विण कमण
      *दूहो*
मूख दिठे दूःख मटे
हेत पसारे हाथ,
अमी झरती आंखडी
ई मंगळ मूर्ति मात.
*हिंगोळदान बापू* ने हदय थी वंदन

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