.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

29 सितंबर 2016

चारणी साहित्य : प्रसतूति कवि श्री चकमक

चारणी साहित्य...!

चारणी साहित्यना मुख्य बे विभाग छे. '' पिंगळ साहित्य '' अने ''डिंगळ साहित्य ''
पिंगळ साहित्य ऐटले संस्कृत साहित्यना छंदोनी रचना मुजब मापतालयुकत रचनावाळुं साहित्य. आवुं साहित्य चारणोऐ धणुं लख्युं छे.
डिंगळ साहित्यमां संस्कृतनी रचना मुजबना छंदो नथी. डिंगळी साहित्य तेना शब्दो, शैली तथा रचनाथी थोडां जुदु पडे छे. छतां पण तेमां कोई अजब चमत्कृति अने रस भरेलां छे. डिंगळ साहित्य माटेनुं मुख्य मान चारणोने ज धटे छे.
चारणी साहित्यना बे प्रकार छे. ऐक तो राजाओनी के दाताओनी कृपाथी सजाॅयेलुं अने बीजुं कुदरती प्रेरणामांथी सजाॅयेलुं भकितपरायण अने आत्मलक्षी.
चारणी काव्योमां नबळी वात नथी संधराई. नबळाई प्रत्ये तो कयारेक वक्र बनीने ममॅना ह्रदय भेदथी ऐणे शोयॅने अने स्वमानने जागृत राख्या छे.
साघु, संतो, भकतोऐ जेम जनसामान्यने नवघा भकितना संस्कार आप्या तेम चारणोऐ जनसामान्यने शुद्घ प्रेमना, निष्कलंकताना, शुद्घ आचारना, आत्मगौरवना, प्रजा-प्रेमना, त्याग तथा बलिदानना संस्कार आप्या छे.
जनसामान्यमां आवा उच्च संस्कारोने सदा जागृत राखनारा आ चारणोऐ ज लोकवाताॅओनुं, दुहाओनुं, प्रेम-शोयॅनी कथाओनुं, प्रकृतिप्रेमनुं अने छंदोनुं साहित्य सजॅयुं छे अने जाळव्युं छे.
आज दिन सुघी संधरायेलुं लोकसाहित्य बहुघा आ चारणोने ज आभारी छे.
पू. काग बापुना शब्दोमां कहीऐ तो, '' आ साहित्यनी गंगा ऐ माणसे बांघेली नहेर नथी के ऐकघारी नदीनी माफक चाली जाय. आतो हेमाळाना खोपरा तोडीने पोताना अथाग पराक्रमथी वहेती गंगा छे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

कोई टिप्पणी नहीं:

Buy Now Kagvani

Sponsored Ads