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28 अक्तूबर 2016

देव गढवीनी रचना

चंद शियासत दानों के हुक्म के गुलाम है
ये वो आदम है जो शैतानों के गुलाम है।

बंदगी कीसे कहते है,ईनको ईल्म कहाँ ?
कुरान समजे नहीं,मतलब के गुलाम है
ये वो आदम है जो शैतानों के गुलाम है।

ईंन्हें मुसलमां कहेना ईस्लाम की तौहीन है
बेगुनाहों के रोज करते कत्ल-ऐ-आम है
ये वो आदम है जो शैतानों के गुलाम है।

हैवानियत को ये बे-वजह जिहाद कहते है
ये मजहब का नहीं होता कभी पैगाम है
ये वो आदम है जो शैतानों के गुलाम है।

युं कुरान-ऐ-पाक को क्युं बदनाम करते है?
कुरान की आयातों में कहीं न ये फरमान है।
ये वो आदम है जो शैतानों के गुलाम है।

ईंन्सानियत से ही गीता प्रेम से ही कुरान है
मजहब हो भाई-चारा नारा-ऐ-आवाम है
ये वो आदम है जो"देव" शैतानों के गुलाम है।

✍🏻देव गढवी
नानाकपाया-मुंदरा
        कच्छ

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