.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

.

Notice Board


Sponsored Ads

Sponsored Ads

Sponsored Ads

28 अक्तूबर 2016

तजुर्बा - देव गढवी

             *तजुर्बा*
               

महेफिल-ऐ-खास से निकली तो तन्हाई से मिली!
बाजार-ऐ-मोहब्बत से गुजरी तो रुसवाई से मिली!

ऐ जिंदगी तेर हर सफ्फे पे श्याही का दाग क्युं है?
कुछ लिखा भी ना गया था और लिखाई सी मीली!

कुछ दुर तक तो चलती रही दामन-ऐ-यार थाम के!
फिर शब-ऐ-मिलन के वक्त ही क्युं जुदाई सी मीली?

अंदाज-ऐ-बयां कुछ युं रहाँ तजुर्बा-ऐ-उम्र-ऐ-दराज
कुछ अपने ही अपनो से"देव,चोट खाई सी मिली..

✍🏻देव गढवी
नानाकपाया-मुंदरा
       कच्छ

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads