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24 नवंबर 2016

|| प्रेम सतक || रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.              *|| प्रेम सतक ||*
.   *रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)*
जूग जुना ई जोगडा, तांतण बांध्या तेम
पोरह वाळान पादरे, पागल करे ई  प्रेम.01
रांणा सांणा मे रीयो, कूंवर्य काळज कोर
दलना बांधेल दोर, जीव्या मुवा ना जोगडा.02
मानो  पदमा  मांगडो, जेने, हैये साचुं हेत
प्रित मां थई ग्यो प्रेत, जाय गते नई जोगडा.03
प्रेम रख्यो वन पांदडे, म्हेल कनक ना मोई
राधव खातर रोई, जनक तनुजा जोगडा.04
जीव सटोसट जुजती, यम नी हारेय ऐह
सावितरीय सुनेह, जीवता करतो जोगडा.05
कोमळ जेनां काळजा,नित प्रिति नां नेम
जम पांहे थी जोगडा, पाछा लीयावे प्रेम.06
मनमां कायम मोहनो, आंख भींजावण अंग
राधा ने लाखो रंग, जोगण कई दउं जोगडा.07
पागल थई ने प्रेममां, मुकीयुं खोळे माथ
सुलोचना वर साथ, जळती दीठी जोगडा.08
प्रेम न जेंणे पारख्यो,ऐनुं, जीवन दोजख जाय
जळ मां रई ने जोगडा,जांणे, हैयां तरस्यां हाय.09
रदय रखापत रंगीयुं, काळज वांचे कोन
सरगे भेळीय सोन, जाय चिता मां जोगडा.10
पर्वत तोड्यो प्रेममां, धधकी पय नी धार
आखर भोकी आर, जो घट प्रेमे जोगडा.11
प्रेम निभाव्यो पिंगळा, जीवडो प्रिते जाय
जोह मजाके जोगडा, हैडुंय फाटेल हाय.12
आकरसाता अंगमां, ऐतो, वालाय ठाला वेम
जोया वण पण जोगडा, प्रांण दीये ईज प्रेम.13
मांणह नी शुं मांडीये, जेने, वातेन वाते वेम
जोयल साचो जोगडा, पंख वाळा मांय प्रेम.14
सारस विण नी सारसी, जूरे नहीं  दे जान
जीवे न नोखी जोगडा, समजो बात सुजान.15
सारस वण नी सारसी, माथा फोड्य मरे
प्रितम वींण परे, जीवे कदी नई जोगडा.16
प्रेम मसंदर प्रांणथी, धर्यो न साचो  ध्रम्म
भांगीन गोरख भ्रम्म, जगवी लई ग्यो जोगडा.17
(मछंदर ने मोह हतो..प्रेम नई..नहीतर जो प्रेम होत तो गोरख तेने लई जई न सकत..मोह तुटी सके..प्रेम नई....)
खांभी जोतां खीमरा, हैये छुटेल हाय
लोडण हैये लाय, जपटी जाळुं जोगडा.18
वेलनटानी वातथी, खिमरो रोयेल खूब
मरियो हुं मेहबूब, जांण्यो ना किं जोगडा.19
दलडा ने भावे दिधा , तें, रांणां कुंवर ने रंग
ऐथी अंगो अंग, मारु, जोतां फरक्युं जोगडा.20
खांभी थई ग्यो खीमरो, रांणो थई ग्यो राख
नजर्युं ज्यां तुं नाख, जीवतां थाता जोगडा.21
मर्यो मर्यो नई मांगडो, एवि,पदमा केरी प्रीत
रांणा कुंवर नी रीत, जरी न विहरो जोगडा.22
पदमा पांणी पांपणे, आंणल विरहण आग
नाग मती ने नाग, जाय भुल्यां से जोगडा.23
प्रिती केरो पारख्यो,  सोंहणीये जे सार
मरियो प्रित मेहार, जेलम नदीये जोगडा.24
हीर सीता पण हेतमा, रांझा प्रितम राम
काळज नोतो काम, ज्योत प्रितु नी जोगडा.25
पामो प्रित पुरांण मां, भारत नोखी भात
वेलेन्टाई नी वात, जाखी दिससे जोगडा.26
व्योम समोय विसाळ ई, कहो लखुं हुं केम
जडे न शबदो जोगडा, प्रेम कह्यो बस प्रेम.27
(जोगीदान गढवी ( चडीया ) कृत `प्रेम पुरांण` सतक (१०० दोहा मांथी)...)
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