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24 दिसंबर 2016

||धरम चारण धार ||-रचना:जोगीदान गढवी (चडीया)

.              *||धरम चारण धार ||*
.     *रचना:जोगीदान गढवी (चडीया)*
.      *ढाळ: विरा तारे हिरा नो वेपार*
धरम चारण धार , जे घर आयुं ले अवतार,
धिंगो एवो धरम चारण धार...टेक
धतंग मेली धुंणवाना , अलख नाद उचार जी..(02)
साधे हर नी सूरता मां (02) आतम नो एकतार
धिंगो एवो धरम चारण धार. ||01||
विसय थी रे वेगळो तुं , देखी ने पर दार जी(02)
दारुय ग्रहता देव ने गण्य(02) भोमी पर नो भार
धिंगो एवो धरम चारण धार. ||02||
भामण जात्युं जेमां भळीयुं, दिक्षा ले दरबार (02)
पुजे जेने प्रेम थी ओली (02) आजे वरण अढार
धिंगो एवो धरम चारण धार. ||03||
मागण मं था मां गणा, तारा मोह ने तुं मार जी (02)
आदम जात उपासवी ई(02) पाप छे पारा वार
धिंगो एवो धरम चारण धार. ||04||
जोगीदान के जाण साचुं, वेधु कर्य मां वार जी(02)
अंतर पट कर उजळा ई (02) सोनल वांणी सार
धिंगो एवो धरम चारण धार. ||05||
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