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6 जनवरी 2017

आळसु ने अवळचंडा माणसो :- कर्ता- मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च)

*||रचना - आळसु ने अवळचंडा माणसो ||*
       *|| गीत सपाखरू ||*
     *|| कर्ता- मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च) ||*
वाटे बेहता निहारी नाके नवरा नखोद वाडे
काम धंधा करे नाही करे काळु काम ,
पछी पारका प्रमाणे हाले पछताये भोठा पडे,
मुखडा बगाडी काढे माणसारा मान,
छताये सुधरे  नही काडा मोढे करी छाला,
काला व्हाला केता हाले कामणे कपाळ,
नही मान करमाये एण समजाये  वाक नानो,
जबरा नाचता छोडी मान री जंजाळ,
भोडा भेरखा बनावी लूट लेता आना भारी भारी,
हारी हारी वात्यु मांडी खोटा हरखाय,
लुखी लालचे लपाटी लेता पीठ पीछे करे लाड़,
खोटी खारी हंभडावी खारू करी खाय,
जुठा बोलडा जुठाणा नाम जुठ नो सहारो जाणे,
जपता सदाय जुठ जुठ होता जाय,
मावा पान ने तमाकू खाता खिचाना खुटाडी मेवा,
थाता बीडी ठुठा जेवा पोते खाली थाय,
रोगी थइ राड़ पाडे खाटले सुताय राय,
त्याय मन माय बेठो उर पछ्ताय,
माटे करो नही खोटा काम जीव जोखमाय,
कहे *मीत*उठो त्यजो आज आळसी कलाय,
---------- *मितेशदान* ------------
*कवि मीत*

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