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18 जनवरी 2017

धुनल मा रो परचो || कर्ता -मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च)

*|| रचना -धुनल मा रो परचो ||*
      *|| छंद -भुजंगी ||*
     *|| कर्ता -मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च) ||*

*दोहा*

*जन्मी शगती तारवा,*
         *भगतो री जंजाळ,*
*वन्दु तुज  ने मावडी,*
         *धुनल तु रखवाळ,*

*धारण सिहा रुप तु,*
          *वटकी माथे राय,*
*खटकी रा मन माय,*
       *तारा परचा रे परखाय,*

  
    *|| छंद - भुजंगी ||*

जन्म धार धर पे धरी रुप आइ,
प्रति सेवकारी  रखण काज माइ,
दयाळी दया दाखनी सुख शरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(1)

समय काळ पे तुजरो हक्क पावे,
अति क्रूर दैत्यो नजिक नाही आवे,
मीठन गाव मे आण ही तोळी फरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(2)

समय वि.सवंता,मीठन मे तु जनमी,
पिता शिव नामे,घरा कुळ प्रणमी,
खरो खेल रच्यो रिदय हाम धरणी,
जपा जाप धुनल महा  दु:ख दरणी,(3)

गयो हिंगलाजे पिता दर्श  करने,
पड़यो वाट मे भंग लाग्यो  उतरने,
छहु मास आरादना हिय भरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(4)

प्रसन्ना हुए मातही वर दिन्ना,
चमत्कारी अश्व एही हाथ किन्ना,
सिधाया मीठन को हिता हाम ठरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख  दरणी,(5)

करी भेट ठाकुर को लाइ घोडी,
सुणी बात आया अखेराज धोडी,
खबर आइ सुणा करा देह हरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(6)

रिवाजा तणा देह देता जम्हारा,
तभी मात आइ बनी के सहारा,
नखा नौ करी रुप सिंहाय वरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(7)

अणी लोह दन्ता,धरी मुख माजी,
बनी सिंह डणकी,घणण घाट गाजी,
कृपा की करुणा,बनी काळकरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(8)

पछाडी अखेराज पंजे थपाट्यो,
चडी उपरे देह को भर दाटयो,
बचावो दयाळी जगत ताप तरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(9)

करी माफ़ रा"ने सुखा धाम थाप्या,
नही पग मेले बिजा वेण आप्या,
हिंडोळे हिचकता गहन आभ सरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(10)

नमु आइ रखो सदा आप चरणे,
हरी कु विचारो,सदा राखो शरणे,
गुणा *मीत*गावे,बनो पाप गरणी,
जपा जाप धुनल महा दु:ख दरणी,(11)

*जय माताजी*

🙏--------- *मितेशदान(सिंहढाय्च)* ----------🙏

*कवि मीत*

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