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26 जनवरी 2017

||हलक हींन्दुस्तान नी|| रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)

.      🇮🇳 *||हलक हींन्दुस्तान नी||*🇮🇳
.  *रचना : जोगीदान गढवी (चडीया)*
.               छंद: सारसी

आवीय  वसीया वीर आर्यो द्रविड केरा देश मां
जनम्या जगत ना नाथ जे कुळ विविध मानव वेशमां
हरीचंद मुरधज सिबी राघव सगर भगीरथ सांन नी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 01||

कौरवा हाथे राज कपटे जोर जपटे जांणीये
मारी अहं गण राज थाप्यां माधवा रुप मांणीये
गाई गीता गगनेय गुंजी कदी बंसी काननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 02||

सिंन्धूय घाटी के हड़प्पा मोहे जोदड पण मळी
दाटेल भों थी दीपी उठीयुं सभ्यतानी सांकळी
आ विरता नो वारसो  जो चबह चंगे खाननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 03||

पोरस लड्यो बउ पोरहे बळ बधुं हारी बेसीयो
आलेक झांन्डर आवियो पंजाब मां नव पेसीयो
आजेय जग ने याद तेगूं ई  टीपु सुलताननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 04||

मोभी मगधविर मौर्य राजा अखील हींदे आविया
चाणंक्य जेवा चतुर गुरुओ लोक सामे लावीया
अई बुद्ध जेवा संत परवा जरी न करे जाननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 05||

सोळेय सांमत डणक देता गगन नादो गाजीया
बळीयो हतो बहादुर जोधो  रंग प्रथवी  राजीया
जननी हती ई हींद जाई खरी महमद खान नी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 06||

अहरांण पर किल्लो अढीसो लोह अंगे लई लडे
हाकेम आखा हीदना ई पांव अकबर नव पडे
रांणे रखेली  टेक रजवट रंग राजस थान नी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 07||

समसेर लई निकळ्यो शिवाजी मरद ई महराठ नो
हिंगोळ ने हैये धरी पग नव भर्यो पहराठ नो
दुशमन तणां दळ कटक जेर्या मरद ते मुगलान नी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 08||

उत्तान पद जे पिता ध्रुवनो मनु पुत्तर मानीयें.
जाकोय भ्राता नाम प्रीय व्रत जबर राजा जानिये
वाके भये दस पुत्र तामे तीन भगवां तांननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 09||

बाकी बच्या जे सात पाड्या भाग द्विपो भोममां
जंबुय द्विपे राज अगनीध जबर आव्यो जोम मां
ते देश नामे हीम व्रश जे मलक वधवण माननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्ताननी.|| 10||

अगनीध्र ना नव पुत्र जे नव खंड भोमी भागीयुं
मोटो हुतो अजनाभ नामे मलक हिमव्रश मागीयुं
नीज नाम जोडी वधी अजनाभव्रश ना आननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्ताननी.|| 11||

अजनाभ पुत्तर देव रूषभ दीव्य तोजे दळकीयो
ताको भयो विर भरत पुत्तर नाम भारत भळकीयो
सिंन्धू नदी थी नाम हिंन्दु जुनीय वात्युं जांननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 12||

भारत तणीं ई भोम ने अनहद गुलामी आवियुं
मुगलो तणी ज्यां हटी त्यांतो गीत गोरा गावियुं
अंगरेज सामे आटके नव जरी परवा जाननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 13||

पांडेय मंगल प्रफुल चाकी लाल बाल ने पालजी
गोपाल करशन गोखले की कृष्ण वरमा कालजी
बिसमिल्ल सा बहादुर विर असफाक उल्ला खाननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.|| 14||

सार्डस ने ना छोडीयो ई भगत ने शिद भूलीयें
अंतर खुशी आझाद माटे महा मांने मूलीयें
सुखदेव ने गुरु राज गोठी गीत चोला गाननी
जांणोय जोगी दांन हरखे हलक हींन्दु स्तान नी.||15||

( 9, 10,11,12 ..ऐ चार मां भारत ना केटला नामो
बदलाया (हिमवर्ष - अजनाभ वर्ष, पछी भारत वर्ष) ते
विगत ने आलेखवा प्रयत्न करेल छे...)

(......जोगीदान चडीया कृत.. राष्ट्र वंदना पच्चिसी मांथी................)

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