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20 फ़रवरी 2017

अमीरी क्या बीचारी है :- रचना ब्रह्मानंद स्वामी

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🌺फकीरी में मज़ा जीस को, अमीरी क्या बीचारी है ।। 🌺

फकीरी में मज़ा जीस को,  अमीरी क्या बीचारी है.......

तजे सब काम दुनिया के, फीकर घरबार के छूटे.... 2
सदा एकांत में वासा, याद प्रभु की प्यारी है ।।
फकीरी में मज़ा जीस को, अमीरी क्या बीचारी है......

नहीं नोकर कीसी जनके, न दिल में लालसा धनकी.... 2
सबूरी धार कर मनमें, फिरे जंगल विहारी है ।।
फकीरी में मज़ा जीस को, अमीरी क्या बीचारी है........

मिला सतसंग संतन का, चले नित ज्ञान की चर्चा.... 2
पिछाना रूप अपने को, द्रैत सब दूर टारी है ।।
फकीरी में मज़ा जीस को, अमीरी क्या बीचारी है.......

सभी जग जीव सें प्रीती, बराबर मान अपमाना..... 2
वो " ब्रह्मानंद " पूरण में, मगन दिन रैन सारी है ।।
फकीरी में मज़ा जीस को, अमीरी क्या बीचारी है.........

🌸 ।। जय नारायण ।।  🌸🏵 ।। जय गुरूदेव ।। 🏵
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