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3 फ़रवरी 2017

भजन - कर्ता - मितेशदान गढवी(सिंहढायच)

*|| भजन ||*
       *|| रचना- धुळे गयो अवतार ||*
       *|| ढाळ - राम ने सिद ने भुली जाय ||*
       *|| कर्ता - मितेशदान गढवी (सिंहढाय्च) ||*

जगत जनम नो सार न जाणे,
                   भुली गयो  संसार
ए नो, धुळे गयो अवतार,(टेक.)

करम धरम नी टेक न जाणे,
             इ जाणे मदीरा पान,
दुष्ट व्रृती ने अंतर धारी,
             सरतो   दुरवय्वहार,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (१)

मानवता ना गुण ना जाणे,
         इ जाणे क्रोध कंकास,
कुथली थी परखाये जगत मां,
             वेर तणो रखवाळ,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (२)

जे, जणनारा नी लाज न राखे,
               इने राखे घर नी बार,
पवित्र मन नु मान घटाडी,
               द्वेष धरे घट माय,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (३)

जुठ्ठु बोली जुठ्ठु खातो,
         इ  खातो दु:ख नो मार,
सत्य धरे नही कदिये जीवन मा,
        (पछी) पछताये समजाय,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (४)

पापी थइ ने पंडे  पीडाये,
        इनो सुनो थ्यो संसार,
ज्ञानी बनी ने फरे अज्ञानी,
         अभीमानी थइ बार,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (५)

भाव भक्ति नो रंग बनावी,
           रंगीये जीव रसाळ,
षड़रिपु नो साथ त्यजो तो,
              थाये  बेडो पार,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (६)

नेक बनी ने नमशो सहु ने,
              ने त्यागो पारकी नार,
"मीत" वेण शुभ उचरो जीवन मा,
            कदी रझळे न घरबार,
      ए नो, धुळे गयो अवतार (७)

*🙏------ मितेशदान(सिंहढीय्च)🙏*

*कवि मीत*

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