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12 अप्रैल 2017

||ताड़का वध|| ||कर्ता मितेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च) ||

*मितेशदान कृत रामायण गाथा,,,माथी,*

  *|| ताड़का वध ||*
*|| छंद - पद्धरि ||*
  *||कर्ता- मितेशदान महेशदान गढ़वी(सिंहढाय्च)||*

प्रति पल घटत्त घटना अनेक,
गुरुमुख वाचा धर करण टेक,
निश्चय किन्नो द्रढ़ सकळ सेव,
मारण  दैेत्या पल पल   सदैव,(1-51)

प्रत्यंचा सणणण चढत   डोर,
खींचत दोरी टणणण   टकोर,
हहकार भयो वन चका   चौंध,
अरणक गाढ़ विकराळ  क्रोध,(2-52)

खलबल हो जावत वन वेरान,
भय भीत पशु भागत खग
हैरान,
सुण कर्णम कलबल दुष्ट नार,
विचलीत मन होवत गति अपार,(3-53)

निरखत रघु राजन धनुष धार,
अकळ्यो मन युद्धन काज नार,
झपटी झटपट दौड़त विकार,
निकटे दूर  निरखत मृत्यु द्वार,(4-54)

देखत लछमन  कु रूप  नार,
भासत निज भ्रातय रंग सार,
कद होवत ताड़ समो निशाच,
हिंसक नारी पापी पिशाच(5-55)

विकराळ देह धर   दूत्तगाम,
वीजळी सम झपटी वे हराम,
ततकार बाण कर तीर छोड़,
सणणण सटाक दोरी  मरोड़,(6-56)

धक धधक लाल लहू वहत खेद,
वख छिन्न काट तीर कियो छेद,
पीड़ धरिय नार पटकइ धरण,
चीख करत देह छोड़त मरण,(7-57)

परसन्न होव गुरु राम  काज,
पापन काटे  थापन  सराज,
मंगल गुण गावत मीत  नीत,
जूठन दळ पावत सत्य जीत,(8-58)

*🙏~~~मितेशदान(सिंहढाय्च)~~~🙏*

*कवि मीत*

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