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19 अगस्त 2017

याद हेमुं आवशे कविश्री दाद

कविश्री दादुदानजीअे हेमु गढवी नी रचेल एक रचना

( छंद सारसी )
चडशे घटा घनघोर गगने मेघ जळ वरसावशे ,
नील वरणी ओढणी ज्यां धरा सर पर धारशे ,
गहेकाट खातां गिर मोरां पियु धन पोकारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,            ||1||

चडशे गगनमां चांदलो ने रात नवरात्युं हशे ,
संध्या मळीने साथीडा जे"दी रासडे रमता हशे ,
तेदी" रमण राधा काननां कोई गीतडां ललकारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,           ||2||

तु:खी पियरनी दिकरी कोई देश देशावर हशे ,
संतापना सासरवासना अे जीवनभर सहेती हशे ,
वहअे वगोव्यानी रेकर्डु ज्या रेडियो पर वागशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,          ||3|| 

मोंघामुली "सौराष्ट्रनी रसधार" जे रचतो गयो ,
ए कलमनी वाचा बनी तुं गीतडां गातो गयो ,
अे लोकढाळो परजना कोई   "दाद"   कंठे धारशे ,
एे वखत आ गुजरातने पछी याद हेमुं आवशे ,           ||4||

( दुहा )
कंठ गयो के"णी गई , गई , मरदानगीनी वात ,
हद थई के हेमुं गयो , गरीब थयुं गुजरात ,

संगीतमां सोंपो पड्यो , गमे सुणवुं गाम ;
तुं मरतां मिजलस गई , दिलनी हेमुदान ,

( भूल होयतो सुधारीने वांचवु )

:- रचयता कविश्री दादुदान प्रतापदान गढवी ,

:- टाईप मनुदान गढवी

.        🙏 वंदे सोनल मातरम् 🙏

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