.

"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

WhatsApp Update

Sponsored Ads

Sponsored Ads

.

Notice Board


Sponsored Ads

6 मार्च 2018

|| सु प्रभात वर्णन || ||कर्ता मितेशदान(सिंहढ़ाय्च) ||

*रचना: सु प्रभात वर्णन*
*छंद प्रिया*
*कर्ता: मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च)*

वसुधे वसु धे जग दा जगते,
जगते सरुते सरला   सुर ते,

सूरते  परोणा,वलोणा घम्मरे,
घम्मरे दधिया पयणा वमळे,

वमळे फूलडा तृणले भींजवे,
भींजवे जलको धरको रिंझवे,

रिंझवे रमता पशुडा  खगला,
खगला पंखको झटके वलखै,

वलखै रुतवा मितवा मिलके,
मिलके चलता नभमे बलखे,

बलखे रूप सु रूप सुंदरता,
करता सुर नाद धरे  फरता,

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मीत*

कोई टिप्पणी नहीं:

Sponsored Ads