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8 अप्रैल 2018

|| रचना:सूर्यवंदना || ||कर्ता मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च)||

*||🌞 सूर्य वंदना🌞 ||*
*|| त्रिकुट बंध ||*
*||कर्ता :मितेशदान गढवी(सिंहढ़ाय्च) ||*

*जगमेय तेज जगावीया,*
*प्रगटेय पोषण पावीया,*
*नित प्रौढ़ में नारायणा,*
*सुख सेविया संसार,*

*तन अगन पीड़ा  तारतो,*
*मन शांत कर महेकारतो,*

*धरपर सकळ सर्जन प्रबळ प्रतिपळ,*
      *अरक रूप अळ दरद दल दळ,*
     *सुखद जीव सुर पिरस पळ पळ,*
      *उमंग द्रग उर    मुरति   मंगळ,*
     *भरण  भर पुर   धान त्रया तळ,*
     *जपत तप तुही जरत तुही जळ,*
     *कहर तुही सब अहर निश कळ,*
     *किरण मीत तुव चरण पर लळ,*
     *धर्म तुज मन धार,*

*गजरूढ़ नभमें गाजता,*
*पंखाळ सप्त  पुकारता,*
*झंखाय जोता जळहळे,*
*दिव प्राछ्टे दिनराय,*

*व्रहमण्ड अधिपति विहरतो,*
*नवखंड  दुड़भ तू  निहरतो,*

*द्रहपति तरंग अंग थल अरक तप  तल,*
        *जगत तिहि सुर अरपु दल जल,*
         *नयण हित नित अवन  निरजल,*
        *रयण   रीत  हर  रखत हरि  दल,*
        *भ्रमण  कण भर अगन बल भल,*
        *नीरज सुरवण पथिक   निधिदल,*
        *सुमित मीत तुय नहीत कटी कल,*
        *प्रवीण हल बल प्रखर  पल पल,*
        *जग मग्यो जगराय,*

*🙏~~~मितेशदान(सिंहढाय्च)~~~🙏*

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