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30 मई 2018

छंद कवित रचिता चारण विजयभा हरदासभा बाटी

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🌸🌸 *छंद = कवित* 🌸🌸

*परख ले बात अरु जात को भी जाँच लिजो.*
*नाहक न बाँधी लिजो वृथा दरसात है.*
*पोकळ सबंध कबु काम नाम राखे नही.*
*ऐसी हाथ ताली तुम छडो बडी घात है.*
*आवे बेठे पास अरु समय को खावे बडो.*
*उपजे ना वेला बीज बंझर दिन रात है.*
*मित के मुखोटे पेंन झुठी मुस्कान छावे.*
*विज ऐसे लोगन को छोडो सुखपात है.*

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*बेठे रेवे साथ पर साथ कछु देवे नही.*
*मार्ग मे तो मिले पर मार्ग उलजावे है.*
*हाथ तो मिलावे यार हाथ कछु देवे नही.*
*आवे अरु जावे खूब देखी फूसलावे है.*
*गले मिल जावे फिर यार गल पावे नही.*
*दोगल दोरंग बडी बात दोहरावे है.*
*कच्चे ऐसे मित मिले ताको कोई रंग नही.*
*विज ऐसे लोगन से भाग मुरझावे है.*

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*आनँद विनोद हूमे खूमची खूदे है खाली.*
*वेला विपरीत परे आँख मुंद खडे है.*
*मिळे है माल जदे जंबुक बन साथ रेवे.*
*खुटे अरु टुटे तदे हाथ बंद पडे है.*
*सरसो समय हेम कही वाह वाही छुटे.*
*विपत पडे है तद मौन मुख झडे है.*
*बहु हाथ ताली मित ताल कछु देवे नही.*
*विज ऐसे लोगन तो प्रेम भाव छडे है.*

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*रचिता=चारण विजयभा हरदासभा बाटी*

*मो=9726364949*

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