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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
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9 फ़रवरी 2019

छंद हरिगीत रचियता :- कविश्री आल

प्रातः स्मरणीय प.पु.आई श्री हांसबाई मां (मोटा रतडिया मांडवी कच्छ)नो 91 मो जन्म महोत्सव वसंत पंचमी ता.10-02-2019 ना रोज उजवाशे ऐ निमिते कविश्री आल नी ऐक रचना आपनी समक्ष मुकववानुं नानकडो प्रयास करेल छे.

छंद हरिगीत
रचियता :- कविश्री आल

संसारनो करी त्याग शकित, संबंध राख्यो शिवथी
सत्य अहिंसा धर्म साचो, जाळव्यो तें जीवथी
भगवती भोळी भेळियाळी, जपत कायम जापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...1
त्याग ने वैरागथी तें, रागने रगदोळियो
जग जाळ त्रोडी कठिन जगदंब, भजयो हरदम भोळियो,
कोळियो नहि लियो कै साल, अन्न खावा आपने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...2
उच्च विचारो अति उत्तम, वदे चारो वेदथी
साव जीवन संत जेवुं, भूरी दूरी भेदथी
सुरसरी जेवुं शुद्ध अंतर, पुंज बाळे पापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...3
तुं अमाणी संपत्ति छो, सुख अमाणो तुं सदा
आसरो नहीं कोई अवरो प्रेम ऐक ज तव पदा
आधि व्याधि ने उपाधि, त्रणे टाळो तापने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...4
अशरण जनने शरण आपी दुःख-दरद थी तारिया
पतित सघळा कर्या पावन, अधमने ओधारिया
अरजी सुणी कवि "आल" नी तुं, कष्ट सघळा काप ने
कर जोड वंदन करूं करनी, आई हांसल आपने...5
रचियता :- कविश्री आल


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