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30 अप्रैल 2019

|| सुर्यवंदना छप्पय || || कर्ता मितेशदान गढवी(सिंहढाय्च) ||

*|| नित्य सूर्यवंदना ||*
*||कर्ता : मितेशदान महेशदान गढवी(सिंहढाय्च) ||*

  *||🌞 क़ळश छप्पय 🌞||*


*(21-4-2019)*

*आलम पवितर आज,रह्यो निर्भर तम राजे,*
*आलम पवितर आज,गुणा गढ़गढ़ तुव गाजे,*
*आलम पवितर आज,कर्यो सृस्टि सुख काजे*
*आलम पवितर आज,बिरद रूप बाप बिराजे*
*अम जीवतर आलम आपनु,तु पवितर नाखेय तेज*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भव पर मित छांटी भेज*

*(22-4-2019)*

*जय त्रिकाल जुगराज,त्रि तला तोल तराजे,*
*जय त्रिकाल जुगराज,सुगंध सुरम्मिय साजे,*
*जय त्रिकाल जुगराज,प्रभा प्रांगण पट पामी,*
*जय त्रिकाल जुगराज,अभा ब्रह्माण्ड अनामी,*
*रथ अश्व रवि रमणांगाणो,कर तार त्रिकाले काज,*
*पट निहर  प्रौढ़ अवनी परे,रहो मित रिदै रविराज*

*(23-4-2019)*

*चकित लाल थइ चाल,ताल सुर संधिकाल तट,*
*चकित लाल थइ चाल,न्याल नत मथ्थ नमत नट*
*चकित लाल थइ चाल,भोर पट झलक जाल भट*
*चकित लाल थई चाल,घोर अतियानंद दृश घट*
*गहकेय गढ़ संध्या गगन,रूप मुग्ध मनोहर राण*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भव मित कृपा सम भाण*

*(24-4-2019)*

*व्रज विहार व्रजचंद,वयळ वन जगत विसारण*
*व्रज विहार व्रज चंद,वर्ण तम कंश विदारण*
*व्रज विहार व्रज चंद,पंडसुत ज्ञान प्रखर पत*
*व्रज विहार व्रज चंद,समर हड़मत सुजान सत*
*मधुवनमधुप मनहर महान,कर चंद क्रिपा किरपाण*
*पट निहर  प्रौढ़ अवनी परे,भजियो मित सम रूप भाण*


*(25-4-2019)*

*सुंदर नभ सम्राट,मनोरम तेज मधुरु,*
*सुंदर नभ सम्राट,प्रति दिन पाड़त पुरू,*
*सुंदर नभ सम्राट,चांद थी आप चकोरा,*
*सुंदर नभ सम्राट,भले शिव थी नय भोरा,*
*कहु बात रूप कश्यपकुमार,पीतअंबर आभ प्रतिम*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,नित वंदन कर मित नीम*

*(26-4-2019)*

*पाप हरे परमेश,ताप नाखी तरवाये,*
*पाप हरे परमेश,श्राप तोड़े सर वाये*
*पाप हरे परमेश,अगन जल आप उगारो*
*पाप हरे परमेश,धरण टाढा दल धारो*
*वंदन हजार विश्वात्मा,अमरतम गंग आधार*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,मित पाप जगत ना मार*

*(27-4-2019)*

*तख्त लाल तरबोळ,सगन भय संधिकाल सम,*
*जकळ जाल जमरोळ,तरफळी चोळ मेघ तम*,
*पकळ मुंड तम प्रौढ़,नित्य नव दन्न नमावे,*
*सबळ भाल नभ सुर्य,सिंघ आसन्न सजावे,*
*भल युद्ध व्योम अवकाश भेर,नित करत रहे नाराण*
*पट निहर  प्रौढ़ अवनी परे,जपता मित नित जग जाण*

*(28-4-2019)*

*अटल देव तम आथ,साथ छाया पळ छायो,*
*अटल देव तम आथ,रोष महा भल्ल रिझायो*
*अटल देव तम आथ,श्वास पर ताप सवायो*
*अटल देव तम आथ,नाथ तम शीश नमायो*
*छत सुर छोगाळो छायलो,अम आथ तिहारो आभ*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,लहु पर मित राखण लाभ*

*(29-4-2019)*

*हर भवान हुंकार,जटा घट किरण आभ जड,*
*विष विकार कर वार,खत्र वट देव महा खड़,*
*तेज ताप जप तार,सार शिव नाथ समोवड,*
*अधिपत आभ उगार,भुवन मध बैठ भरतभड़,*
*उद्गम आप अविनाश अंत,रूप शिव समानी राण*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भोळो मित भजियो भाण*

*(30-4-2019)*

*अट पट सर असमान,आन अंजु सुर अवभूत,*
*तरण अखिल नव तान,दशक अचलातळ भव दुत*
*सतगत्त सर तळी शान,सप्त डाबलपद  सम सुत*
*अजर अमर अभिध्यान,धरा तप जरे ठरे धुत*
*धन अवन दिशा चौ ध्यान धर,सूर धाम असर समरूप,*
*पट निहर प्रौढ़ अवनी परे,भवो मित उजागर भूप*

*🙏---मितेशदान(सिंहढाय्च)---🙏*

*कवि मित*

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