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"जय माताजी मारा आ ब्लॉगमां आपणु स्वागत छे मुलाक़ात बदल आपनो आभार "
आ ब्लोगमां चारणी साहित्यने लगती माहिती मळी रहे ते माटे नानकडो प्रयास करेल छे.

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2 अगस्त 2016

सूर्य वंदना -02-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

मनगल वार मिहिर तूं, मन गल अमणीं मान
जन मनगल कज जोगडा, मनगल सूर महान

हे भगवान मिहिर नाम सूर्य, मनगल (मंगळ वार) हुं वंदन करी छुं के आप मन गल ( मन नी गल= वात) मानो अने जन (लोको) नु मनगल (मांगल्य ) करवा मन मां रहेल मन गल (मान ने गाळो) हे महान सूर्य नारायण मारा आपने नीत्य वंदन छे
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1 अगस्त 2016

श्रध्धांजली

अन्तर्राष्ट्रीय महिला चारण स्मारिका का होगा प्रकाशन

अन्तर्राष्ट्रीय महिला चारण स्मारिका का होगा प्रकाशन .

Cguco एवं चारणाचार पत्रिका द्वारा चारण समाज की महिला शक्ति जो कि विभिन्न क्षेत्र में सक्रिय है, उनकी एक परिचयात्मक विवरण युक्त स्मारिक बनाई जा रही है. श्रीमती चन्द्रिका गढ़वी ने बताया की राजस्थान गुजरात एवं पुरे देश हि  नहीं वरन विदेश में कार्यरत चारण समाज की महिलाओं की जानकारी उनकी उपलब्धियां स्मारिका में प्रकाशित होगी. दीपावली पुर्व यह स्मारिका प्रकाशित हो जायेगी , जिसके पश्चात बड़ोदा में सम्मान समारोह आयोजित किया जायेगा. जिसमें उन सभी महिलाओं को आमन्त्रित किया जायेगा. अतः वे सभी महिलाएं अपने अपने क्षेत्र में विभिन्न उपलब्धि रखती हो , उनसे निवेदन है कि अपनी जानकारी ( नाम पता पद व्यवसाय एवं विवरण ) निम्न नम्बर पर वाटसअप करें
Email : info@cguco.org
Whatsapp on below Chandrikaben : 00971563048442
Sultan Singh Deval
07737095071
Jay Gadhvi:
00971551063173
Mahendra Singh charan
09983921903
Rahul Lila:
9925818193

मागुं हुंतो एटलुं मावा -रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)

.       *|| मागुं हुंतो एटलुं मावा ||*
.   *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
.     *ढाळ: सोनल मा आभ कपाळी*

देख्या दूनियाव ना दावा, वैभव ने धन नी वावा
गेबी तारा गूंणला गावा, मांगूं हूंतो ऐटलुं मावा...टेक

संत नो कायम संग तूं देजे, पूरण कथा मां प्रेम (०२)
निर अभिमानी मनडूं नाचे, नीत्य पूजा नुं नेम
अल्लख व्रत पाळीयें आवा, मागुं हुंतो ऐटलुं मावा, 01

कपट कोदी ना काळजे कोळे, गावुं हरी नां गान (०२)
भोम आखी ना जीव हुं भाळुं, सघळा एक समान
सुरतायुं सून्य समावा, मागुं हुंतो ऐटलुं मावा, 02

भोग वासायुं वेगळी भागे, मन देज्यो मजबूत (०२)
चरित चुकूं नई चडीयो चारण, एक रंगो अवधूत
चारे मूख वेद हो चावा, मागुं हुंतो ऐटलुं मावा, 03

भव आखो ना भूल थी भूलुं, कोयदी तूंने कान (०२)
शोक हरख ने ऐक सरीखा, जोवुं हुं जोगीदान
प्रिति रस भगती पावा, मागुं हुंतो ऐटलुं मावा, 04

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सूर्य वंदना -01-08-16 रचना जोगीदान गढवी(चडीया)

साया वर छाया तणा, सांय रखी कर साय
जाय सायां ई जोगडा, समरे सूरज स्हाय

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